कुसमेली मंडी में बढ़ रही किसानों की मुश्किलें..
किसानों को अपनी उपज रोड में डालने के लिए मजबूर टीन शोड में व्यापारियों का माल…
छिदंवाडा (चौथा स्तंभ)मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में इन दिनों किसान दर-दर भटक रहा है कभी अपनी उपज का सही दाम नही मिलने को लेकर तो मंडी में व्यवस्था से परेशान होकर मजबूरी में मंडी के बाहर सडक पर आपनी उपज डाल रहे है। ऐसी ही देखने को मिला कुसमेली मंडी में बनी अव्यवस्था के बाद उनकी समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले वाजिब दाम के लिए किसान जूझ रहे हैं दूसरी तरफ अब मंडी मे बेचने के लिए परिसर में जगह नही मिलने से जिला का किसान परेशान है। किसान सुबह 5 बजे से मंडी के बाहर लाइन लगाकर खड़े है। लेकिन फिर भी उसको अपनी उपज डालने के लिए जगह नहीं मिल रही है इसलिए मजबूरी में किसान मंडी के बाहर सड़क पर अपनी उपज मक्का डाल रहे हैं।
टीन शोड में रखा है व्यापारियों का माल, किसान हो रहे परेशान…
जिलें की कुसमेली मंडी में इन दिनों जिलें के किसानों परेशान है। क्योंकि इन दिनों व्यापारी टीन शोड से आपना माल नही उठा रहे है और मंडी प्रशासन भी इन व्यापारियों को अपना माल उठाने के लिए नहीं कहते जिसके कारण इन दोनों कृषि उपज मंडी कुसमेली में ऐसी हालत बनी हुई है
अब मंडी में अनाज का समय बदल दिया गया है। शुक्रवार से सुबह 5 बजे से सुबह 10 बजे तक ही किसानों के अनाज को परिसर मेें नीलामी के लिए मुख्य गेट से अंदर आने दिया जाएगा। इसके बाद आने वाले किसानों को दूसरे दिन सुबह पांच बजे तक का इंतजार करना होगा। गुरुवार को इस संबंध में मंडी प्रबंधन ने बकायदा अनाउंसमेंट भी करा दिया। प्रबंधन अचानक बढ़ी मक्का की आवक और इस वजह से परिसर के अंदर लग रहे जाम के कारण यह निर्णय लेना बता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसी अनाज रखने के लिए व्यवस्थाएं बनती है समय फिर से बढ़ा दिया जाएगा। फिलहाल जो निर्णय लिया गया है उससे मंडी के बाहर अनाज के वाहनों की कतार और बढऩे की संभावना ज्यादा है।

कई एकड़ में फैली मंडी में हर साल ये हालात
ध्यान रहे संभाग की ए ग्रेडमंडियों में शामिल छिंदवाड़ा कृषि उपज मंडी कई एकड़ में फैली है लेकिन हालात ये हैं कि 50 हजार क्विंटल से ज्यादा अनाज आ जाए तो हालात बिगड़ जाते हैं। इस बार मक्का की शुुरुआत में आवक ज्यादा नहीं हुई। किसान दाम बढऩे केा लेकर इंतजार कर रहे थे। इधर दामों में कोई खास बढ़ोतरी न होने के कारण किसान अब मक्का को बेचने के लिए निकाल रहे हैं। मंडी में मक्का के कुछ दाम भी बढ़े हैं ऐसे में आवक अचानक बढ़ गई है। यही वजह है कि अव्यवस्थाएं फैल गई। मक्का की खरीदी से पहले परिसर में बाकयदा सफेद लाइन डालकर वाहनों के आने जाने और अनाज के ढेर लगाने की व्यवस्था बनाई गई थी लेकिन किसानों ने इस पर ध्यान दिया न मंडी के मैदानी कर्मचारी इसको लेकर सजग रहे।

अब हालात बेकाबू हो गए हैं।
शेडों में छल्लियों के कारण भी होती है परेशानी
मंडियों में लाइसेंसी व्यापारियों द्वारा समय पर अपने अनाज का परिवहन न करने की स्थिति भी देखी जाती रही है। मंडी हर साल अनाज खरीदने के बाद उसके उठाव के लिएभी निश्चित समय व्यापारियों के लिए तय करती है। नियम के अनुसार खरीदी के 48 घंटे के भीतर खरीदा अनाज मंडी से बाहर हो जाना चाहिए। व्यापारी यदि बाहर अनाज नहीं भेज पाया तो उसे उसके अपने निजी गोदाम मेें उसे रखना होगा लेकिन मंडी में तीन चार दिन तक शेडों में छल्लियां लगी रहती हैं। ऐसे में ज्यादातर जगह घिरी रहती है और किसानों के अनाज फैलाने के लिए जगह ही नहीं बचती। व्यापारियेां के खिलाफ ठोस कार्यवाही प्रबंधन नहीं करता क्योकि व्यापारियों से ही मंडी को टैक्स मिलता है।

कुचिया व्यापारियों ने बिगाड़े हालात
कृषि उपज मंडी में अनाज को लाने वाले किसानों की संख्या कम कुचिया व्यापारी या फिर दलालों की ज्यादा संख्या आती है। ये कुचिया व्यापारी या दलाल गांवों से किसानों का मक्का खरीदते हैं और मंडी में लाते हैं। इनसे मंडी परिसर में अव्यवस्थाएं ज्यादा फैल रहीं हैं। मक्का के पीक सीजन में इनकी संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में इन पर भी लगाम लगाने के लिए ये निर्णय लिया गया है लेकिन इसमें ऐसे किसान जो खुद अपना अनाज लेकर मंडी में आ रहे हैं उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।


