चौरई में उद्यानिकी विभाग की बड़ी लापरवाही! नर्सरी तक सिमटी गतिविधियां, योजनाओं से अनजान किसान

Chautha Sthambh

चौरई में उद्यानिकी विभाग की बड़ी लापरवाही! नर्सरी तक सिमटी गतिविधियां, योजनाओं से अनजान किसान

उद्यानिकी विभाग की योजनाएं सिर्फ जिला मुख्यालय के आसपास के क्षेत्र मोहखेड, परासिया के कुछ ही क्षेत्र के किसानों तक सिमट कर रह गई है योजनाएं

रिपोर्ट -ठा. रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ ) जिलें के चौरई विकासखंड में उद्यानिकी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। विभाग की गतिविधियां सिर्फ कागजों और नर्सरी तक सीमित होकर रह गई हैं, जबकि किसानों को उन्नत बागवानी, सब्जी और फूलों की खेती के लिए जागरूक करने की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। परिणाम यह है कि चौरई क्षेत्र के अधिकांश किसान आज भी उद्यानिकी विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं।
जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉली हाउस, शेड नेट हाउस, ड्रिप सिंचाई, फल-फूल और सब्जी उत्पादन जैसी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन चौरई क्षेत्र में इन योजनाओं का प्रचार-प्रसार लगभग नगण्य है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता के चलते किसानों तक योजनाओं की जानकारी ही नहीं पहुंच पा रही है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि उद्यानिकी विभाग द्वारा न तो गांवों में कोई जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं और न ही किसानों को आधुनिक बागवानी के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कई किसानों को तो यह भी नहीं पता कि पॉली हाउस और सब्जी उत्पादन के लिए सरकार भारी अनुदान देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्यानिकी विभाग सक्रिय होकर किसानों को मार्गदर्शन दे, तो चौरई क्षेत्र में सब्जी, फल और फूलों की खेती का बड़ा विस्तार हो सकता है। इससे किसानों की आय में भी कई गुना वृद्धि हो सकती है।
विभाग की निष्क्रियता से उठ रहे सवाल
चौरई क्षेत्र में न तो सब्जी क्लस्टर विकसित किए गए और न ही फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कोई अभियान चलाया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी क्षेत्र में क्या काम कर रहे हैं।
जरूरत है जवाबदेही की
किसानों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि उद्यानिकी विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और चौरई क्षेत्र में किसानों को योजनाओं की जानकारी देने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

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