मक्का किसानों की हालत बदतर, मंडियों में पसरा ‘मक्के का सागर’

Chautha Sthambh

मक्का किसानों की हालत बदतर, मंडियों में पसरा ‘मक्के का सागर’
खरीदारों के अभाव में हजारों टन मक्का सड़ने को मजबूर, 800 करोड़ से अधिक का नुकसान

By admin 1फरवरी 2026

छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ)
जिले के मक्का उत्पादक किसान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि कृषि उपज मंडियों और किसानों के खलिहानों में हजारों टन मक्का खरीदारों के अभाव में पड़ा-पड़ा सड़ रहा है। औने-पौने दामों पर भी मक्का खरीदने को कोई तैयार नहीं है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
कुसमेली कृषि उपज मंडी में मक्के की आवक लगातार बनी हुई है, लेकिन बिक्री और उठाव लगभग पूरी तरह ठप है। मंडी परिसर में चारों ओर फैला मक्का ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो यहां ‘मक्के का सागर’ उमड़ पड़ा हो। किसान कई-कई दिनों से अपनी उपज के बिकने की आस में मंडियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन निराशा ही हाथ लग रही है।


समर्थन मूल्य कागजों तक सीमित
सरकार द्वारा मक्का का समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने के कारण जिले के किसानों को अब तक 800 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सरकारी खरीदी शुरू होती, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।

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  • बिजली संकट और महंगाई ने बढ़ाई मुश्किलें
    किसानों की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। लगातार बिजली ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या के कारण सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे गेहूं की फसल भी खतरे में पड़ गई है। वहीं खाद, बीज, कीटनाशक और कृषि उपकरणों के बढ़ते दामों ने किसानों की कमर पहले ही तोड़ दी है।
    कांग्रेस का हमला: खेती घाटे का सौदा बनी
    जिला कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा शासन में खेती-किसानी घाटे का सौदा बन चुकी है और किसान बदहाली के दौर से गुजर रहा है। सरकार न तो समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित कर पा रही है और न ही किसानों को बिजली व संसाधनों की पर्याप्त सुविधा दे पा रही है।
    कांग्रेस ने मांग की है कि मक्का की तत्काल सरकारी खरीदी शुरू की जाए, किसानों को नुकसान का मुआवजा दिया जाए और बिजली संकट का स्थायी समाधान निकाला जाए, अन्यथा आने वाले दिनों में किसान आंदोलन को मजबूर होंगे।

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