चौरई में कृषि विभाग की सुस्ती से किसान परेशान!
उन्नत खेती की जानकारी नहीं, जैविक खेती शून्य — प्राइवेट खाद-बीज दुकानों के संचालक के भरोसे अधिकांश किसान..?
छिंदवाड़ा(चौथा स्तंभ ) जिलें के तहसील चौरई में कृषि विभाग की उदासीनता अब खुलकर सामने आने लगी है। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण क्षेत्र के किसानों को उन्नत खेती और आधुनिक तकनीकों की जानकारी तक नहीं मिल पा रही है। हालात यह हैं कि पूरे चौरई क्षेत्र में जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या लगभग शून्य बताई जा रही है।
कृषि विभाग का मुख्य काम किसानों को नई तकनीक, उन्नत बीज, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना होता है, लेकिन चौरई क्षेत्र में ऐसी कोई जागरूकता गतिविधि दिखाई नहीं दे रही।
नहीं हो रहे प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम…
स्थानीय किसानों का कहना है कि
गांवों में कृषि शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं हो रहे
खेत स्तर पर किसानों को मार्गदर्शन देने कोई अधिकारी नहीं पहुंचते है, यदि कोई जिले के अधिकारी चौरई क्षेत्र में आते है तो सिर्फ चांद, पांजरा क्षेत्र का ही दौरा करते है स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारी आखिर चौरई तहसील में दुसरे गांव में क्यों नहीं जाते है, क्या दुसरे गांव में कोई किसान नहीं है विगत दस सालों से कागज़ उठाकर देख लीजिये कि चांद पांजरा की किसानों को छोड़कर दुसरे किसानों को कही प्रशिक्षण या जिला स्तर भ्रमण राज्य स्तर भ्रमण में गोपालपुर, बीझावाडा, सलखनी, बिलदां केदारपुर हरनभटा, पिपरिया मानसिंह परासिया, खमरिया, धोडावाडी, सर्रा, आदि गांव में किसी किसानों को कोई कार्यक्रम या प्रशिक्षण में बुलाया गया हो,, अभी कुछ दिन पहले कृषि रथ लेकर चाय नाश्ता करने के लिए अधिकारी कर्मचारी सिर्फ पंचायत भवन में आए उन्हें किसानों से कोई मतलब नहीं था उन्हें तो अपने कागज में दौरा दिखाना था।
जैविक खेती और नई तकनीकों की जानकारी कागजों तक सीमित है
प्राइवेट दुकानों के भरोसे किसान
कृषि विभाग की निष्क्रियता के कारण किसान मजबूर होकर प्राइवेट खाद-बीज की दुकानों संचालक के मार्गदर्शन पर निर्भर हो गए हैं। किसान वही खाद और बीज खरीद रहे हैं जो दुकानदार बता रहे हैं, जबकि वैज्ञानिक सलाह और सही मार्गदर्शन का अभाव बना हुआ है।कई किसानों का कहना है कि अगर कृषि विभाग समय-समय पर खेतों में पहुंचकर सही सलाह दे, तो फसल उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार हो सकता है।
जैविक खेती का नाम तक नहीं…
सरकार लगातार जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कर रही है, लेकिन चौरई क्षेत्र में इसका असर कहीं नजर नहीं आता।किसानों का कहना है कि उन्हें जैविक खेती की न तो सही जानकारी दी गई और न ही कोई प्रशिक्षण मिला।
किसानों में नाराजगी..
किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मैदान में कम और दफ्तरों में ज्यादा दिखाई देते हैं, जिसके कारण योजनाओं का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा।
उठ रहे बड़े सवाल..
आखिर चौरई क्षेत्र में कृषि विभाग किसानों तक क्यों नहीं पहुंच रहा?
जैविक खेती के प्रचार-प्रसार के लिए क्या कदम उठाए गए?
क्या विभागीय लापरवाही के कारण किसान प्राइवेट दुकानों के भरोसे हैं?
अगर समय रहते कृषि विभाग ने सक्रियता नहीं दिखाई, तो चौरई क्षेत्र के किसान आधुनिक खेती की दौड़ में पीछे रह सकते हैं।

