चौरई में ‘फर्जी गिरदावरी’ का बड़ा खेल कागजों में गेहूं, खेतों में चना — फसल सिंडिकेट से सरकारी खजाने को चूना

Chautha Sthambh

चौरई में ‘फर्जी गिरदावरी’ का बड़ा खेल
कागजों में गेहूं, खेतों में चना — फसल सिंडिकेट से सरकारी खजाने को चूना

छिंदवाड़ा/चौरई (चौथा स्तंभ )
चौरई विधानसभा क्षेत्र में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड और खेतों की वास्तविक स्थिति के बीच इतना बड़ा अंतर सामने आया है कि इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि संगठित “फसल सिंडिकेट” का खेल माना जा रहा है। पंचायत दिशा समाचार की पड़ताल में सामने आया है कि गिरदावरी (फसल का सरकारी रिकॉर्ड) में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली का दुरुपयोग किया जा रहा है।
कागजों में कुछ और, खेतों में कुछ और
जांच के दौरान कई गांवों में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई।
जहां खेतों में चना की फसल खड़ी है, वहां सरकारी रिकॉर्ड में गेहूं दर्ज है। वहीं कुछ स्थानों पर खाली जमीन को भी गेहूं की फसल दिखाकर गिरदावरी में दर्ज कर दिया गया।
पिपारिया मानसिंग हल्का में बड़ा खुलासा
पंचायत दिशा समाचार की टीम ने पिपारिया मानसिंग हल्का के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया।
खसरा नंबर 267 में सरकारी रिकॉर्ड में गेहूं की फसल दर्ज है
लेकिन मौके पर चना की फसल खड़ी मिली
इसी तरह पटवारी हल्का में भी बड़ा अंतर सामने आया।
रिकॉर्ड के अनुसार खसरा नंबर 267 में 2.096 हेक्टेयर (लगभग 4.75 एकड़) में चना दर्ज
जबकि मौके की स्थिति इससे अलग पाई गई।
कैसे चलता है पूरा खेल
सूत्रों के अनुसार यह पूरा खेल गिरदावरी के स्तर पर शुरू होता है।
फर्जी गिरदावरी – बिना खेत पर गए कागजों में फसल दर्ज कर दी जाती है
फर्जी पंजीयन – उसी रिकॉर्ड के आधार पर समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए पंजीयन
सरकारी खरीद में खेल – बिचौलिए किसानों के नाम पर फसल बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं
इस पूरे नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर “फसल सिंडिकेट” कहा जा रहा है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग की पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या पटवारी बिना मौके पर जाए ही गिरदावरी दर्ज कर रहे हैं?
बिना भौतिक सत्यापन के इतना बड़ा डेटा पोर्टल पर कैसे अपलोड हो गया?
क्या इस पूरे खेल में स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत है?
किसानों में आक्रोश

क्षेत्र के जागरूक किसानों का कहना है कि इस तरह के फर्जीवाड़े से ईमानदार किसानों का हक मारा जा रहा है और सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हो सकता है।
किसानों ने मांग की है कि:
पूरे चौरई विधानसभा क्षेत्र में गिरदावरी का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए
दोषी पटवारियों और बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
MSP पंजीयन की भी जांच हो
बड़ा सवाल

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर मामले में सख्त कार्रवाई करता है या फिर फर्जी गिरदावरी और फसल सिंडिकेट का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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