चौरई में फर्जी गिरदावरी का बड़ा खेल…
कागजों में गेहूं, खेतों में चना — किसान सही फसल दर्ज करने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर..?
छिंदवाड़ा(चौथा स्तंभ )
चौरई तहसील के ग्राम पिपरिया मानसिंह में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां खसरा क्रमांक 267 में गिरदावरी में भारी गड़बड़ी सामने आई है। सरकारी रिकॉर्ड में खेत में गेहूं की फसल दर्ज है, जबकि मौके पर चना की फसल खड़ी मिली है। इस गड़बड़ी के कारण किसान अपनी वास्तविक फसल दर्ज कराने के लिए कई दिनों से अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि चौरई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर “फर्जी गिरदावरी” का खेल चल रहा है। खेतों में वास्तविक स्थिति कुछ और है, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में कुछ और दर्ज किया जा रहा है। इससे समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली का दुरुपयोग होने की आशंका भी जताई जा रही है।

चार दिन से दावा-आपत्ति लंबित
पीड़ित किसान ने बताया कि उसने अपनी सही फसल दर्ज कराने के लिए चार दिन पहले दावा-आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक तहसील कार्यालय में उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि चौरई तहसीलदार ने अभी तक पटवारी द्वारा दर्ज की गई गिरदावरी की आईडी तक नहीं खोली है।
किसान का कहना है कि जब उसके खेत में चने की फसल लगी है तो गेहूं की फसल दर्ज कैसे हो गई इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है, किसान ने बताया कि अब आपनी चने की उपज वह कहां बेचेगा। इस लापरवाही के कारण किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पिपरिया मानसिंह हल्का में बड़ा अंतर
पंचायत दिशा समाचार की पड़ताल में सामने आया कि
खसरा नंबर 267 में सरकारी रिकॉर्ड में गेहूं दर्ज है
जबकि मौके पर चना की फसल खड़ी मिली
इसी तरह हल्का क्षेत्र के अन्य रिकॉर्ड में भी फसल और जमीन की वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर देखने को मिला।
कैसे चलता है पूरा खेल
सूत्रों के मुताबिक यह पूरा खेल गिरदावरी के स्तर से शुरू होता है।
फर्जी गिरदावरी: बिना खेत पर गए कागजों में फसल दर्ज
फर्जी पंजीयन: उसी रिकॉर्ड के आधार पर समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए पंजीयन
सरकारी खरीद में खेल: बिचौलिए किसानों के नाम पर फसल बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं
स्थानीय स्तर पर इस नेटवर्क को “फसल सिंडिकेट” के नाम से जाना जा रहा है।
राजस्व अमले पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने छिंदवाड़ा जिले के राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या पटवारी बिना मौके पर जाए ही गिरदावरी दर्ज कर रहे हैं?
बिना भौतिक सत्यापन के डेटा पोर्टल पर कैसे अपलोड हो गया?
क्या इस पूरे खेल में स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत है?
किसानों में आक्रोश
ऐसी धटना जिलें की कई तहसील से सामने आ रही हैं इस पूरे खेल में एक बड़ा फसल सिंडिकेट काम कर रहा है। चौरई क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ी से ईमानदार किसानों का हक मारा जा रहा है और सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान हो सकता है। किसानों ने मांग की है कि पूरे चौरई विधानसभा क्षेत्र में गिरदावरी का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए और दोषी पटवारियों व बिचौलियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल
अब बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कार्रवाई करता है या फिर फर्जी गिरदावरी और फसल सिंडिकेट का यह खेल यूं ही चलता रहेगा। फिलहाल किसान अपनी ही जमीन में उगी फसल को सरकारी रिकॉर्ड में सही दर्ज कराने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। लेकिन चौरई तहसील के राजस्व विभाग सुनने को तैयार नहीं है….
