मनरेगा से गांधी का नाम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण, कांग्रेस का कड़ा विरोध
नाम बदलने से नहीं सुलझेगी बेरोजगारी, मनरेगा से गांधी का नाम हटाना गलत – कपाले
छिंदवाड़ा(चौथा स्तंभ) जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश कपाले ने केन्द्र सरकार द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण विधेयक–2025 (वीबी-जी राम) का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह गांधीजी के विचारों और ग्राम स्वराज की अवधारणा का भी अपमान है।

कपाले ने कहा कि महात्मा गांधी रामराज्य और ग्राम स्वराज के प्रबल समर्थक थे। उनका स्पष्ट मत था कि जब तक गांव आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तब तक सशक्त भारत की कल्पना अधूरी रहेगी। ऐसे में मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना से गांधीजी का नाम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण और गलत निर्णय है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नए नियमों के तहत मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों पर डाल दिया गया है, जबकि कई राज्य पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मध्यप्रदेश इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ने की आशंका है। कपाले ने कहा कि मनरेगा ने वर्षों तक करोड़ों ग्रामीणों को रोजगार दिया है, लेकिन आज बढ़ती महंगाई के बावजूद मजदूरी दर में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई। किसानों और श्रमिकों को योजना से और अधिक जोड़ने पर ध्यान देने के बजाय सरकार ने पूरा आर्थिक भार राज्यों पर डाल दिया है। कई राज्यों को मनरेगा का भुगतान तक नहीं मिल पा रहा है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा की केन्द्र सरकार पहले रेलवे स्टेशनों और शहरों के नाम बदलती रही है, अब योजनाओं के नाम बदले जा रहे हैं कहीं आने वाले समय में देश का नाम ही न बदल दिया जाए।

