मक्का खरीदी पर पूरी तरह मौन क्यों हुई भाजपा सरकार?:- नकुलनाथ
–झूठी घोषणाओं और वादों में ही दोगुनी कर रहे किसानों की आय
–किसानों को आश्वासन व घोषणाएं नहीं, फसलों का उचित मूल्य दो सरकार
–बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितता किसानों को बना रही कर्जदार
छिन्दवाड़ा:(चौथा स्तंभ) किसान खेतों से सिर्फ फसलें नहीं…. देश और स्वयं के परिवार के लिए सपनें भी उगाता है। मौसम की अनुकूलता……समय पर खाद….बीज….उचित मूल्य पर प्राप्त हो जाए…..कीट पतंगों से फसलें बच जाएं, तब आधे ख्वाब पूरे हो जाते हैं। सरकार अपनी घोषणाओं और वादों के अनुरूप उपज खरीद ले तो सपने साकार हो जाते हैं, किन्तु वर्तमान सरकार किसान भाइयों के सपनों को बुरी तरह रौंद रही है। उक्त उदगार जिले के पूर्व सांसद माननीय नकुलनाथ जी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में व्यक्त किए।
माननीय नकुलनाथ जी ने जारी बयान में भाजपा की सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मक्का उपज को 2400 रुपए प्रति क्विंटल की खरीदी पर पूरी तरह मौन क्यों है? वर्तमान में जिस मूल्य पर उपज खरीदी जा रही है उससे लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा फिर सरकार ने MSP का झूठा झुनझुना क्यों थमाया?। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में किसान भाइयों को आय दोगुनी करने का झांसा दिया, अब संसद में कह रहे हैं कि इसे दोगुनी करने की कोशिश जारी है। जमीनी हकीकत और सच्चाई यह है कि विगत 10 वर्षों में देश के किसान भाइयों पर 28 लाख 50 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। अगर इस प्रति किसान में विभाजित किया जाए तो लगभग देश के प्रत्येक किसान पर 1 लाख रुपए का कर्ज है। इस कर्ज के लिए सरकार जिम्मेदार है, क्योंकि खाद, बीज और कीटनाशक से लेकर प्रत्येक कृषि सामग्री का मूल्य दोगुना हो चुका, किन्तु फसलों का दाम आधा होकर रह गया। पंद्रह माह की श्री कमलनाथ जी की सरकार के कार्यकाल को छोड़ दें तो भाजपा ने हर मौके और मोर्चे पर किसान भाइयों को सिर्फ ठगा है।
शहरी क्षेत्र से लगे किसानों को लूट रहे स्मार्ट मीटर:-
माननीय नकुलनाथ जी ने जारी बयान में आगे कहा कि खाद की कालाबाजारी, खाद की चोरी और शहरी क्षेत्र से लगे किसान भाइयों को स्मार्ट मीटर के माध्यम से लूटा जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र के आस-पास के कृषक भाइयों ने मुझसे भेंट कर स्मार्ट मीटर की लूट से अवगत कराया है। मैं प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि शहरी क्षेत्र के कृषि पम्पों पर लगे स्मार्ट मीटर तत्काल हटाए जाए, जिससे की अनाप शनाप बिजली बिलों के आर्थिक बोझ से निजात मिल सके। उन्होंने सवाल उठाया कि जब घरेलू उपभोक्ताओं के द्वारा ही स्मार्ट मीटर का सतत रूप से विरोध किया जा रहा है फिर कृषि पम्पों पर इन्हें लगाना साफ जाहिर करता है कि यह किसानों को परेशान करने की मंशा से लगाए गए हैं। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि मक्का उपज की खरीदी 2400 रुपए प्रति क्विंटल से तत्काल प्रारंभ की जाए साथ ही अधिकतम मूल्य 3000 हजार रुपए निर्धारित करें। क्योंकि मक्का उत्पादक किसान इस वक्त सर्वाधिक परेशान व त्रस्त है। सरकार अपनी घोषणा अनुरूप और अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी करें।

