कल न बन जाए झोलाछाप की लिखी दवा जानलेवा कुंडा में खुलेआम एलोपैथिक इलाज, प्रशासन की चुप्पी से बुलंद झोलाछाप के हौसले….

Chautha Sthambh

कल न बन जाए झोलाछाप की लिखी दवा जानलेवा
कुंडा में खुलेआम एलोपैथिक इलाज, प्रशासन की चुप्पी से बुलंद झोलाछाप के हौसले….


छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) चौरई विकासखंड के ग्राम कुंडा में झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासनिक आदेश, चेतावनियाँ और पूर्व में सामने आए सिरप कांड के बावजूद आज भी ग्रामीणों की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
ताजा मामला झोलाछाप अजीत से जुड़ा है, जिसके द्वारा लिखा गया एक दवा पर्चा अब सामने आया है। यह पर्चा नाम न बताने की शर्त पर एक ग्रामीण ने मीडिया को सौंपा है। पर्चे में कफसोम सिरप सहित अन्य एलोपैथिक दवाइयाँ लिखी गई हैं, जबकि इस तरह की दवाएं लिखने का अधिकार केवल एमबीबीएस डॉक्टरों को ही होता है।


बीईएमएस धारी, पर एलोपैथिक इलाज!
सूत्रों के अनुसार झोलाछाप अजीत खुद को बीईएमएस (आयुर्वेदिक) बताता है, लेकिन इलाज पूरी तरह एलोपैथिक पद्धति से कर रहा है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधे-सीधे ग्रामीणों की जान को खतरे में डालने जैसा है।


खबरें छपीं, आदेश हुए… पर कार्रवाई शून्य
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कुंडा के झोलाछापों को लेकर कई बार खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। बीएमओ अशोक सेन द्वारा पूर्व में कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद झोलाछाप कुछ समय के लिए क्लीनिक बंद कर फरार हो गया था।
लेकिन जैसे ही प्रशासन की निगरानी ढीली पड़ी, वही झोलाछाप दोबारा सक्रिय हो गया।
सवालों के घेरे में प्रशासन
सिरप कांड के बाद अधिकारियों द्वारा अवैध क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कुंडा के मामले में ये निर्देश कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संरक्षण के चलते झोलाछाप जांच की आंच से बचते रहे।
ग्रामीणों की गुहार
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
अवैध क्लीनिक तत्काल सील किए जाएं
झोलाछाप के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो
भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो
प्रशासन का बयान

इस संबंध में एसडीएम चौरई प्रभात मिश्रा ने कहा
“कुंडा में झोलाछापों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। एलोपैथिक दवाइयाँ लिखने वालों के खिलाफ गठित टीम को निर्देश दे दिए गए हैं।”
अब बड़ा सवाल
जब सब कुछ सामने है —
पर्चा भी, शिकायत भी, नियमों का उल्लंघन भी —
तो कार्रवाई कब?
कहीं ऐसा न हो कि प्रशासन की देरी किसी मासूम की जान पर भारी पड़ जाए।

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