सुर्खियों में छिंदवाड़ा: “जिला परियोजना समन्वयक का ‘अटूट मोह’ या सिस्टम की चुप्पी?”

Chautha Sthambh

सुर्खियों में छिंदवाड़ा: “जिला परियोजना समन्वयक का ‘अटूट मोह’ या सिस्टम की चुप्पी?”
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ )
सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना केंद्र में वर्षों से जमे जिला परियोजना समन्वयक (DPC) को लेकर अब सवाल और गंभीर हो गए हैं। लंबे समय से एक ही पद पर जमे इस अधिकारी का स्थानांतरण क्यों नहीं हो पा रहा—यह अब आमजन से लेकर विभागीय कर्मचारियों तक की जुबान पर है। क्या यह महज संयोग है या फिर ‘सिस्टम की सेटिंग’ का खेल?
नियमों पर सवाल, सिस्टम पर उंगली”
शासन की स्थानांतरण नीति साफ कहती है कि समय-समय पर अधिकारियों का ट्रांसफर जरूरी है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। लेकिन छिंदवाड़ा में यह नियम जैसे बेअसर साबित हो रहा है। वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे DPC को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
जमाव से बढ़ती अनियमितताओं की आशंका?”
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से मनमानी, पक्षपात और नेटवर्किंग का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि अब इस पूरे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
गंभीर आरोप: सप्लाई में गड़बड़ी और अवैध वसूली?”
सूत्रों के अनुसार, कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास/आवासीय विद्यालयों में सामग्री सप्लाई को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि—
सप्लायर्स से लाखों रुपये की अवैध वसूली के आरोप
सूत्रों की जानकारी के अनुसार सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत संचालित होने वाले छात्रावास एवं आवासीय विद्यालय में सामग्री सप्लाई में कथित पक्षपात.
परिवार से जुड़ी दुकानों से माल सप्लाई कराने की चर्चाएं
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि चौथा स्तंभ नही करता है, लेकिन लगातार उठते सवाल पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर शक पैदा कर रहे हैं।

डीपीसी के संरक्षण में बरसों से पदस्थ है छात्रावास एंव आवासीय विधालय में वार्डन..?

छिंदवाड़ा जिले में सर्व शिक्षा अभियान के द्वारा संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय में कई छात्रावास में बरसों से अधिकारी के संरक्षण में वार्डन पदस्थ हैं लेकिन उन्हें हटाया नही गया है जबकि नियम है कि हर 3 साल के बाद इन छात्रावास एवं आवासीय विद्यालय से वार्डन को हटाकर नई वार्डन की भर्ती करना होता है लेकिन जिले में बरसों से डीपीसी ने इन छात्रावास एवं आवासीय विद्यालय की वार्डन को नही हटाये है जिसके कारण इन जगहों पर आप भ्रष्टाचार खूब फल फूल रहा है..?

शिकायतें कई, कार्रवाई शून्य!”
जानकारी के मुताबिक, इन मामलों में कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ भी ठोस सामने नहीं आया। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर अधिकारी को संरक्षण किस स्तर से मिल रहा है?
जनता का सवाल—कब टूटेगी चुप्पी?”
अब जिले के शिक्षक, कर्मचारी और आमजन पूछ रहे हैं—
आखिर कब होगा इस अधिकारी का स्थानांतरण?
क्या शासन इस मामले में संज्ञान लेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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  • स्थानांतरण नीति पर उठे बड़े सवाल”
    वर्षों से एक ही पद पर जमे अधिकारी
    गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई नहीं
    पारदर्शिता और जवाबदेही पर संकट

    👉 अब नजरें शासन और प्रशासन पर टिकी हैं—क्या छिंदवाड़ा में बदलाव आएगा या फिर ‘सिस्टम की चुप्पी’ यूं ही बनी रहेगी?

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