पथरीली ज़मीन में हरियाली की क्रांति
मोहखेड़ के किसान कैलाश पवार ने जी-9 केले की खेती से रचा इतिहास
By admin 1फरवरी 2026
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ)।
जहाँ किसान खेती करने से कतराते हैं, वहीं मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम भुताई के प्रगतिशील किसान श्री कैलाश पवार ने उसी पथरीली और मुरम वाली ज़मीन को सफलता की प्रयोगशाला बना दिया। आधुनिक तकनीक और नवाचार के दम पर उन्होंने 18 एकड़ क्षेत्र में जी-9 किस्म के केले की खेती कर यह साबित कर दिया कि कठिन ज़मीन भी अगर सही सोच और तकनीक मिले, तो सोना उगल सकती है।
श्री पवार ने गत वर्ष अप्रैल 2025 में पुणे से उन्नत जी-9 किस्म के पौधे मंगवाकर ड्रिप सिंचाई प्रणाली के साथ रोपण किया था। महज़ 11 महीनों में ही फसल पूरी तरह तैयार हो गई है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख तक मुनाफे की उम्मीद
किसान कैलाश पवार के अनुसार 15 फरवरी के बाद मार्च तक पूरी फसल की कटाई हो जाएगी। अनुमान है कि उन्हें प्रति एकड़ 2.5 से 3 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त होगा।
फसल की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन है कि जबलपुर और नागपुर के व्यापारी स्वयं खेत पर पहुँचकर निरीक्षण कर चुके हैं और सीधे खेत से उपज खरीदने के लिए संपर्क कर रहे हैं।
जहाँ खेती असंभव मानी जाती थी, वहाँ लहलहाया केला
सबसे खास बात यह है कि यह खेती उस ज़मीन पर की गई है, जिसे आमतौर पर खेती के लिए अनुपयोगी माना जाता है। पथरीली और मुरम वाली भूमि में जी-9 केले की शानदार पैदावार ने परंपरागत सोच को पूरी तरह तोड़ दिया है।
कृषि विभाग ने की सराहना
कृषि विभाग की टीम ने भी खेत पर पहुँचकर इस नवाचार का अवलोकन किया और किसान द्वारा अपनाई गई आधुनिक तकनीकों की खुलकर प्रशंसा की। विभाग का मानना है कि यह मॉडल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।

नवाचार की पहचान हैं कैलाश पवार
श्री कैलाश पवार पहले से ही नवाचारी किसान के रूप में पहचाने जाते हैं।
पिछले वर्ष 6 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती कर उन्होंने शानदार लाभ कमाया।
इस वर्ष भी
6 एकड़ में स्ट्रॉबेरी,
1 एकड़ में ब्लूबेरी,
1 एकड़ में गोल्डन बेरी की खेती की है,
जिनकी उपज 15 फरवरी के बाद बाजार में आने की संभावना है।
अन्यपथरीली ज़मीन में हरियाली की क्रांति
मोहखेड़ के किसान कैलाश पवार ने जी-9 केले की खेती से रचा इतिहास
किसानों के लिए प्रेरणा
कैलाश पवार की यह सफलता यह साफ संदेश देती है कि खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि नवाचार, तकनीक और मेहनत से इसे मुनाफे का मॉडल बनाया जा सकता है।
उनकी यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्र के किसानों को परंपरागत खेती से आगे सोचने और नए प्रयोग करने की प्रेरणा देगी।
रिपोर्ट -ठा. रामकुमार राजपूत की स्पेशल रिपोर्ट
मोबाइल -8839760279,8989115284

