गिट्टी क्रेशर का आतंक: सत्ताधारी संरक्षण में नियमों की धज्जियां, हिवरासेनाड़वार के ग्रामीण दहशत में..?

Chautha Sthambh

गिट्टी क्रेशर का आतंक: सत्ताधारी संरक्षण में नियमों की धज्जियां, हिवरासेनाड़वार के ग्रामीण दहशत में
पांढुर्ना (चौथा स्तंभ) पांढुर्ना जिले के ग्राम हिवरासेनाड़वार में संचालित त्रिवेदी गिट्टी क्रेशर ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन चुका है। सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में चल रहा यह क्रेशर न केवल खनिज नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहा है, बल्कि गांव के लोगों की जिंदगी, स्वास्थ्य और खेती—तीनों को तबाह कर रहा है।
ब्लास्टिंग से कांप रहे घर, दीवारों में दरारें
ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर में लगातार की जा रही अवैध ब्लास्टिंग से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। कई घरों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। ब्लास्टिंग के दौरान उड़ते पत्थर खेतों में गिर रहे हैं, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
धूल और शोर से दम घुट रहा
क्रेशर मशीन से निकलने वाली तेज आवाज और उड़ती धूल ने गांव को प्रदूषण का हॉटस्पॉट बना दिया है।
बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं
आंखों में जलन, सिरदर्द और नींद न आने की समस्या आम हो चुकी है
रात में मशीनों की गड़गड़ाहट से लोग ठीक से सो तक नहीं पा रहे
खेती और पशुपालन भी बर्बाद
किसानों का कहना है कि क्रेशर से फैल रही धूल के कारण
फसलों की पैदावार घट रही है

मिट्टी की उर्वरता कमजोर हो रही है
पशुओं पर असर पड़ने से दूध उत्पादन तक प्रभावित हो रहा है
यानी यह क्रेशर सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक रीढ़ तोड़ रहा है।
पर्यावरण स्वीकृति और नियमों पर बड़ा सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि—

क्या इस क्रेशर के पास वैध पर्यावरण स्वीकृति (EC) है?
क्या प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन किया जा रहा है?
आखिर किसके संरक्षण में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं?
प्रशासन को चेतावनी: कार्रवाई नहीं तो जनआंदोलन
हिवरासेनाड़वार के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पांढुर्ना एसडीएम, खनिज विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि
क्रेशर संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए
सभी अनुमतियों और नियमों की जांच हो
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
बड़ा सवाल
क्या खनिज विभाग और जिला प्रशासन कागजों में ही सब कुछ ठीक बताकर इस गंभीर मामले से आंखें मूंदे रहेगा?
या फिर हिवरासेनाड़वार के ग्रामीणों को मिलेगा न्याय और राहत?
👉 अब देखना यह है कि यह खबर प्रशासन की नींद खोलती है या फिर सत्ताधारी संरक्षण में ग्रामीण यूं ही प्रदूषण की सजा भुगतते रहेंगे।

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