By admin- 13 फरवरी 2026
छिन्दवाड़ा(चौथा स्तंभ) शौक और जुनून बड़ी चीज है उदयभान ठाकरे की उम्र जब 8 साल थी उस दौरान जब वे स्कूल जाते तो रास्ते में गांव जमीदारों के घरों में रेडियो बजता था स्कूल छोड़कर उदय भान रेडियो सुनने के लिए खड़े हो जाते थे रेडियो सुनने का जुनून इस कदर था कि उन्होंने बाद में इसे अपना शौक बना लिया और फिर फरमाइशी गीतों के लिए लेटर लिखना शुरू कर दिया आज देश और दुनिया में रेडियो के जरिए करीब डेढ़ हजार उनके मित्र हैं कई देशों से वेस्ट ऑडियंस का सम्मान मिल चुका है।

60 साल की रेडियो से दोस्ती विदेश से मिला सम्मान।
उदयभान ठाकरे बताते हैं कि रेडियो से उनकी दोस्ती 60 साल पुरानी है सबसे पहले उन्होंने जापानी रेडियो सुनना शुरू किया था। मेरा रेडियो जापान हिंदी सुनने का अवसर तब प्राप्त हुआ जब डिजिटल ट्रांजिस्टर और ऐप नहीं हुआ करते थे केवल बड़ा रेडियो और ट्रांजिस्टर हुआ करता था ,तब एक दिन में अपने रेडियो के काटे के अपनी अंगुलियों से घुमा रहा था तभी एक सुंदर और मीठी ध्वनि, संगीत सुनाई दी जो मुझे बहुत अच्छी लगी, और वह, संगीत जब समाप्त हुई और आवाज आई ये NHK रेडियो जापान की हिंदी सेवा है और उसी समय मेरी अंगुली उसी स्थान पर रुक गई और मैं तुरत ही कापी पेन लेकर मार्क किया कि किस नबर पर किस समय और कितने बजे यह स्टेशन लगता इसके बाद मैंने दूसरे दिन उसी जगह पर स्टेशन लगा कर रेडियो जापान सुनने लगा और जब मैने पहला पत्र पोस्ट किया और रेडियो से मेरा पत्र पढ़ा गया तो मुझे खुशी का ठिकाना नहीं था उसके बाद में कार्यक्रम सुनता रहा और पत्र भेजता रहा ,और इसी रेडियो के माध्यम से मेरे बहुत से रेडियो मित्र बने,जिसमें मुख्य चुन्नी लाल कैव्रत,रजनीश कुमार शर्मा,ओम प्रकाश वर्मा और बद्री प्रसाद वर्मा किसान और अन्य,,
मुझे प्रसन्नता तब हुई जब अंक, 14मार्च2009को nhk श्रोता पत्रिका में मेरे लिफाफे की फोटो छपी थी,


और अंक11सितम्बर2008मेरी एक छोटी सी कविता छपी थीं,उसके बाद मुझे बहुत से ग्रीटिंग कार्ड ,वेरिफेशन कार्ड ,रुमाल स्टीकर इत्यादि रेडियो जापान से प्राप्त हुए थे और 23दिसंबर2012केभारत और जापान के राजनयिक रिश्तों को स्थापना के 60वे वर्ष के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली के जापान फाउंडेशन सभागृह में श्रोता मित्र और जापान से आए उद्घोषक मुनिश शर्मा जी और ताकाशी निमी जैसे उद्घोषक से मिलकर बहुत ही खुशी ही
और इसके बाद बूझो तो जाने प्रतियोगिता में भाग लेकर मुझे 3 प्रमाण पत्र प्राप्त हुए,
मेरे पास रेडियो जापान से प्राप्त हुए कैलेंडर,फोटो कार्ड, टेबल कैलेंडर वाइस रिकॉर्ड ,इत्यादि अभी तक संभाल कर रखा हुआ है।

डेढ़ हजार से ज्यादा मित्र हजारों फरमाइश हुई पूरी।
उदयभान ठाकरे ने ईटीवी भारत को बताया कि रेडियो सुनने की शौक ने पूरे देश सहित विदेश में उनके करीब डेढ़ हजार रेडियो मित्र बना दिए हैं जिसे भी लगातार संपर्क में है इतना ही नहीं देश के कई रेडियो चैनल सहित आकाशवाणी और विदेश के रेडियो में उनके हजारों गाने प्रसारित हो चुके हैं और कई पत्र शामिल किया जा चुके हैं।


विदेश से आया था बुलावा पासपोर्ट ने रोकी यात्रा।
उदयभान ठाकरे ने बताया कि उन्हें देशभर में कई जगह रेडियो के कार्यक्रमों में बुलावा आता है बी जाते भी हैं एक बार उन्हें रसिया से बुलावा आया था लेकिन साल 2008 में उनकी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ उनके पास पासपोर्ट नहीं था इसके कारण वे रसिया नहीं जा पाए लेकिन भारत में गुवाहाटी और दिल्ली में ज्यादातर रेडियो के कार्यक्रम होते हैं जहां पर श्रोता के रूप में पहुंचते हैं और वहां उन्हें सम्मान भी मिलता है।

