देश में प्रथम बना छिंदवाड़ा: प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना में 99% आवास पूर्ण कर रचा इतिहास
छिंदवाड़ा(चौथा स्तंभ)। दूरस्थ पहाड़ियों और घने वनांचल से घिरे आदिवासी अंचल में विकास की एक नई इबारत लिखी गई है। छिंदवाड़ा जिले ने प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में देशभर में प्रथम स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया है। कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायण के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ श्री अग्रिम कुमार के नेतृत्व में प्रशासन ने 99% आवास पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल कायम की है।
यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन, मजबूत मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर सामूहिक प्रयासों की प्रेरक कहानी है।

लक्ष्य से उपलब्धि तक: रिकॉर्ड सफलता की यात्रा
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत जिले को 5797 आवासों का लक्ष्य मिला था, जो विशेष रूप से भारिया आदिवासी परिवारों के लिए निर्धारित था। सुदृढ़ कार्ययोजना, नियमित फील्ड मॉनिटरिंग और ग्राम स्तर पर सतत संवाद के परिणामस्वरूप 5737 आवास (99%) पूर्ण कर लिए गए।
यह उपलब्धि देश में सर्वाधिक आवास पूर्णता दर के रूप में दर्ज हुई और छिंदवाड़ा को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान दिलाने में निर्णायक साबित हुई।

नवाचार का मॉडल: सामूहिक क्रय से बचत और गुणवत्ता
दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण सामग्री महंगे दामों पर मिलने की समस्या को प्रशासन ने अवसर में बदला।
25 ग्रामों के 1067 हितग्राहियों की सामूहिक बैठक आयोजित की गई
सहमति से सीमेंट, सरिया और ईंट का सामूहिक थोक क्रय किया गया
अधिकृत सप्लायर्स से सामग्री सीधे गांवों तक पहुंचाई गई
प्रभावशाली परिणाम:
सामग्री दरों में 2 से 55 रुपये तक कमी
प्रति परिवार 9–10 हजार रुपये की बचत
कुल 99,21,443 रुपये की सीधी बचत
लगभग 67 लाख रुपये परिवहन व मजदूरी में बचाए गए
2,68,28,995 रुपये की सामग्री 1067 हितग्राहियों को उपलब्ध
यह मॉडल पारदर्शिता, गुणवत्ता और सामूहिक शक्ति का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

रिकॉर्ड समय में निर्माण: 2 माह में 1052 आवास पूर्ण
समय पर सामग्री उपलब्धता और प्रशासन की सतत निगरानी के चलते दो माह से भी कम समय में 1052 आवास पूर्ण कर लिए गए। हितग्राहियों को परिवहन, तकनीकी मार्गदर्शन और व्यवस्थागत सहयोग मिला, जिससे निर्माण कार्य तेज, सुचारु और गुणवत्तापूर्ण रहा।

सामाजिक सशक्तिकरण की मिसाल
यह पहल केवल मकान निर्माण तक सीमित नहीं रही। इससे भारिया समुदाय में आत्मविश्वास, आर्थिक मजबूती और सम्मानजनक जीवन की नई आशा जगी है। कम दरों पर उच्च गुणवत्ता की सामग्री उपलब्ध कराकर प्रशासन ने साबित किया कि सहभागी, पारदर्शी और समावेशी विकास ही वास्तविक प्रगति की पहचान है।

छिंदवाड़ा की यह उपलब्धि आज पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बन चुकी है—जहां जनसहभागिता, नवाचार और संवेदनशील प्रशासन मिलकर विकास की नई दिशा तय कर रहे हैं।

