कागज़ों में बने डैम, ज़मीन पर ग़ायब!पांढुर्णा जिले के सौसर के उंटेकाटा में लाखों का जल घोटाला, दो डैम सिर्फ फाइलों में मौजूद.?

Chautha Sthambh


चौथा स्तंभ (पांढुर्णा)
पांढुर्णा जिले के सौसर विकासखंड अंतर्गत ग्राम उंटेकाटा में जल संरक्षण के नाम पर बड़ा डैम घोटाला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में जहां चार डैमों के निर्माण की जानकारी दर्ज है, वहीं जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। मौके पर जांच में साफ हो गया कि दो डैमों का अस्तित्व ही नहीं है, इसके बावजूद उन पर लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च दिखा दी गई।
लाखों की राशि निकाली, डैम नदारद
जानकारी के मुताबिक उंटेकाटा में चार डैमों के निर्माण के लिए शासन से मोटी राशि स्वीकृत हुई थी। भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन जब ग्रामीणों ने वास्तविक स्थिति देखी तो सामने आया कि दो डैम बनाए ही नहीं गए। यानी सरकारी धन सीधे-सीधे कागज़ों में हजम कर लिया गया।

श्रवण पावनकर (पंच उटेकाटा )

ग्रामीणों की शिकायतें फाइलों में दबी
इस गंभीर मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसडीएम और जिला पंचायत सीईओ तक लिखित शिकायतें दीं। हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद महीनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतों की फाइलें अब तक सरकारी दफ्तरों की अलमारियों में धूल फांक रही हैं।


जांच में घोटाला साबित, फिर भी कार्रवाई शून्य
सूत्रों का दावा है कि प्रशासनिक स्तर पर हुई जांच में यह स्पष्ट रूप से साबित हो चुका है कि दो डैम आज भी मौके पर मौजूद नहीं हैं। इसके बावजूद न सरपंच पर कार्रवाई, न सचिव पर गाज, और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी से जवाबदेही तय की गई।
सरपंच-सचिव को बचाने में जुटा सिस्टम?
ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय अधिकारी सरपंच और सचिव को बचाने में लगे हुए हैं। यही वजह है कि साफ-साफ घोटाला उजागर होने के बाद भी दोषियों पर कोई एफआईआर या रिकवरी की कार्रवाई नहीं की गई।
जल संकट में जूझते गांव, कागजों में लहराता विकास
एक ओर गांव पानी की समस्या से जूझ रहा है, दूसरी ओर डैम सिर्फ कागजों में बनाकर विकास का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। यह मामला न सिर्फ वित्तीय भ्रष्टाचार का है, बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों और भरोसे के साथ खुला खिलवाड़ भी है।
अब बड़ा सवाल
जब जांच में डैम न होने की पुष्टि हो चुकी है तो कार्रवाई क्यों नहीं?
किसके संरक्षण में दबाया जा रहा है यह मामला?
क्या दोषियों से सरकारी राशि की वसूली होगी या घोटाला यूं ही दबा दिया जाएगा?
उंटेकाटा का यह मामला पंचायती राज व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर कागजों के डैम की तरह यह मामला भी बहा दिया जाएगा।

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