कलेक्टर के जाते ही खुली कन्वर्ज़न की फाइलें, आदिवासी जमीनों पर सियासी-भूमाफिया घमासान

Chautha Sthambh

कलेक्टर के जाते ही खुली कन्वर्ज़न की फाइलें, आदिवासी जमीनों पर सियासी-भूमाफिया घमासान

चौथा (छिंदवाड़ा ) कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह के तबादले के बाद जिले में आदिवासियों की कन्वर्ट की गई जमीनों का मामला अब परत-दर-परत खुलने लगा है। वर्षों से दबे इस खेल में भूमाफिया, प्रशासन और राजनीतिक दबाव की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी बीच गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी पर 15 करोड़ रुपये की अवैध मांग का सनसनीखेज आरोप लगाया है। आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए देवरावेन भलावी ने साफ कहा कि

“आदिवासियों की जमीन औने-पौने दामों में बिकवाई गई। उन्हें न तो सही कीमत मिली और न ही उनकी सहमति का सम्मान हुआ। हम आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, किसी से पैसा मांगने का सवाल ही नहीं उठता।”

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  • कन्वर्ज़न पर उठे गंभीर सवाल
    स्थानीय आदिवासी संगठनों का आरोप है कि पूर्व कलेक्टर ने नियमों को ताक पर रखकर जमीन कन्वर्ज़न किया, जिससे सीधे-सीधे भूमाफिया को फायदा पहुंचा। आदिवासी समाज का कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि सुनियोजित खेल है।

    गोंडवाना पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर इन कन्वर्ज़न मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। पार्टी का दावा है कि आदिवासियों को उनका हक दिलाकर ही दम लिया जाएगा।

    मलहनवाड़ा की ज़मीन सौदे पर भी विवाद
    मामले में मलहनवाड़ा का एक सौदा भी चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक शेख अल्फाज शाह ने गोकल ऊइके से 16 एकड़ जमीन 1करोड 11लाख रुपये में खरीदी।
    अब सवाल यह उठ रहा है कि—

    क्या यह जमीन आदिवासी भूमि कानून के तहत संरक्षित थी?

    क्या सौदे में वास्तविक बाजार मूल्य दिया गया?

    और क्या कन्वर्ज़न से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं?

    अब निगाहें प्रशासन पर
    कलेक्टर के जाने के बाद सामने आ रहे इन खुलासों ने प्रशासन की भूमिका को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों की मांग है कि—

    सभी संदिग्ध कन्वर्ज़न की पुनः जांच हो

    दोषी अधिकारियों और दलालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

    और जिन आदिवासियों की जमीन छीनी गई है, उन्हें पूरा न्याय और मुआवजा मिले

    जिले में यह मामला अब सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकार, प्रशासनिक ईमानदारी और राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज़ होने के संकेत दे रहा है।

    गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी का कहना

    छिंदवाड़ा जिले में वर्षों से एक संगठित भूमाफिया तंत्र गरीब आदिवासियों के नाम का दुरुपयोग कर उनकी जमीनों को छलपूर्वक खरीदने, फर्जी सौदों के माध्यम से कब्जा करने और बाद में अपने नाम पर कन्वर्ज़न करवाकर करोड़ों का मुनाफा कमाने का खेल चला रहा है। यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व, स्वामित्व और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

    भूमाफियाओं की चाल क्या है?

    पहले गरीब, अशिक्षित आदिवासियों को बहला-फुसलाकर या दबाव में उनके नाम से जमीन खरीदते हैं।

    फिर उसी जमीन को नियमों का दुरुपयोग कर अपने नाम पर कन्वर्ट करवाते हैं।

    पूरा लाभ भूमाफिया उठाते हैं, जबकि आदिवासी सिर्फ नाम मात्र के मोहरे बनते हैं।

    यह सुनियोजित षड्यंत्र आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चल रहा है।

    गोंडवाना गणतंत्र पार्टी इस पूरे खेल को उजागर करने के लिए जिला स्तर पर अभियान चला रही है। भूमाफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई हेतु शिकायतें की जा रही हैं।

    लेकिन सच कड़वा होता है — जैसे ही भूमाफिया पर चोट पड़ती है, उनके चाटुकार सक्रिय हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर झूठ फैलाया जा रहा है कि गोंगपा के लोग कमीशन मांग रहे हैं। यह सीधा-सीधा भूमाफियाओं को बचाने की साजिश है।

    देवरावेन भलावी
    जिला अध्यक्ष
    गोंडवाना गणतंत्र पार्टी,

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