आयुक्त के आदेश को ठेंगा! परिवीक्षा शिक्षकों के तबादले और अटैचमेंट पर जिले में मनमानी, जनजातीय कार्य विभाग फिर विवादों में

Chautha Sthambh

आयुक्त के आदेश को ठेंगा! परिवीक्षा शिक्षकों के तबादले और अटैचमेंट पर जिले में मनमानी, जनजातीय कार्य विभाग फिर विवादों में
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ)। मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग में नियमों की अनदेखी का एक और मामला सामने आया है। विभाग के आयुक्त द्वारा जारी स्पष्ट आदेशों के बावजूद जिले स्तर पर अधिकारियों की मनमानी जारी है। परिवीक्षा अवधि में कार्यरत शिक्षकों के तबादलों को निरस्त करने के सख्त निर्देश के बाद भी आदेशों की अवहेलना होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


आयुक्त जनजातीय कार्य श्रीमन शुक्ला द्वारा जारी आदेश (क्रमांक/शिक्षा स्था. 3/स्था./1026/2025/12745) में स्पष्ट कहा गया है कि तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी होने से पहले किए गए जिला स्तरीय तबादले नियम विरुद्ध हैं और उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त माना जाए। साथ ही यह निर्देश भी दिया गया है कि ऐसे किसी भी शिक्षक को वर्तमान पदस्थापना से कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद सूत्रों के अनुसार जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारी आदेश की भावना के विपरीत कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं।
इसी कड़ी में छिंदवाड़ा जिले में एक शिक्षिका के नियम विरुद्ध अटैचमेंट का मामला चर्चा में है। जानकारी के अनुसार जुन्नारदेव विकासखंड में पदस्थ शिक्षिका गायत्री देवी सनोडिया, जिनकी मूल पदस्थापना माध्यमिक शाला चटुआ नवेगांव, संकुल केंद्र नलासू में है, उन्हें परिवीक्षा अवधि के दौरान ही चौरई विकासखंड के हरदुआ माल स्थित आदिवासी बालक आश्रम में अधीक्षक के रूप में अटैच कर दिया गया।

जबकि शासन के नियमों के अनुसार परिवीक्षा अवधि में किसी भी शिक्षक का अटैचमेंट प्रतिबंधित है।
विभागीय सूत्रों का दावा है कि यह कोई एकल मामला नहीं, बल्कि अटैचमेंट के नाम पर लंबे समय से अंदरखाने खेल चल रहा है। चर्चाओं के अनुसार प्रभाव और पहुंच के आधार पर मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली से दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी गहराने का खतरा बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। स्थानीय नागरिकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने कलेक्टर से मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही नियम विरुद्ध अटैचमेंट को तत्काल निरस्त कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है—क्या विभाग में चल रहे कथित अनियमितताओं पर लगाम लगेगी या मामला एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएगा।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *