फर्जी मेडिकल यूनिवर्सिटी में करोड़ों की वसूली प्रशासन बना धृतराष्ट्र, कलेक्टर बंगले के पास चल रहा गोरखधंधा

Chautha Sthambh

फर्जी मेडिकल यूनिवर्सिटी में करोड़ों की वसूली
प्रशासन बना धृतराष्ट्र, कलेक्टर बंगले के पास चल रहा गोरखधंधा

चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा ) जिले में मेडिकल शिक्षा के नाम पर एक बड़ा और खतरनाक फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। कलेक्टर बंगले के बेहद करीब, साथ ही गुरैया रोड और परासिया क्षेत्र में कथित “मेडिकल यूनिवर्सिटी”
आर्यवत मेडिकल एजुकेशन साइंसेज काउंसिल
खुलेआम संचालित हो रही है, जहां डॉक्टर बनाने के नाम पर युवाओं से करोड़ों रुपये की वसूली की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग पूरी तरह धृतराष्ट्र बने हुए हैं।

मेडिकल डिग्री नहीं, छलावे का धंधा

यहां “Diploma in Community Medical Service & Surgery” जैसे आकर्षक नाम वाले कोर्स कराए जा रहे हैं, जिनका न तो नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से कोई संबंध है और न ही UGC या राज्य सरकार से किसी प्रकार की मान्यता। युवाओं को भरोसा दिलाया जा रहा है कि यह डिप्लोमा करने के बाद वे डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस कर सकेंगे, जबकि सच्चाई यह है कि ऐसी डिग्री कानूनी रूप से शून्य है।

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  • प्रधानमंत्री योजना के नाम पर खुली लूट

    सबसे गंभीर और आपराधिक पहलू यह है कि इस फर्जी कोर्स को
    “PRIME MINISTER UNREGISTERED DOCTOR UPGRADATION SCHEME (5 YEAR PLAN APPROVED BY PMO OFFICE)”
    जैसी झूठी और भ्रामक योजना के नाम से बेचा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की स्वीकृति का दावा कर गरीब, ग्रामीण और बेरोज़गार युवाओं को जाल में फंसाया जा रहा है। जानकारों के अनुसार ऐसी किसी योजना का कोई सरकारी अस्तित्व ही नहीं है, फिर भी प्रधानमंत्री के नाम पर खुलेआम लूट जारी है।

    तीन लाख दो, डॉक्टर बन जाओ!
    सूत्र बताते हैं कि इस फर्जी यूनिवर्सिटी में तीन से पांच लाख रुपये लेकर दाखिला दिया जाता है।
    न कोई प्रवेश परीक्षा,
    न न्यूनतम योग्यता की जांच,
    न अस्पताल में मान्य इंटर्नशिप—
    बस पैसा दो और “डॉक्टर” बन जाओ।

    यह सिर्फ आर्थिक ठगी नहीं, बल्कि जनता की सेहत से सीधा खिलवाड़ है। ऐसे फर्जी प्रशिक्षित लोग अगर इलाज करेंगे, तो उसकी कीमत मासूम मरीजों को अपनी जान से चुकानी पड़ सकती है।

    कलेक्टर बंगले के पास सब कुछ, फिर भी सन्नाटा
    सबसे बड़ा सवाल प्रशासन पर है।

    जब कलेक्टर बंगले के आसपास और शहर के प्रमुख इलाकों में यह गतिविधि लंबे समय से चल रही है, तो—

    क्या जिला प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं?

    या जानकारी होने के बावजूद जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?

    क्या स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और पुलिस की चुप्पी किसी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है?

    अब कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा खतरा
    प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के नाम पर झूठी योजनाएं चलाना गंभीर आपराधिक कृत्य है। यदि समय रहते इस फर्जी मेडिकल यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला आने वाले समय में बड़े स्वास्थ्य घोटाले और जनहानि का कारण बन सकता है।

    अब सवाल साफ है—
    प्रशासन कब जागेगा?
    कब होगी जांच, सीलिंग और FIR?
    और कब रुकेगा डॉक्टर बनाने के नाम पर चल रहा यह खतरनाक गोरखधंधा?

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