आखिर अधीक्षक किशोर भारती को क्यों बचते नजर आ रहे सहायक आयुक्त
गंदगी और कमियां देख अधीक्षक को लगाई फटकार…
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ ) जिलें के जनजातीय विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एवं आश्रम शालाओं में अवस्था एवं अधीक्षक की मनमानी के कारण जिलें के छात्रावासों में निवासरत आदिवासी बच्चों की जान चली गई है। यह खबर किसी से छुपी नहीं है। लेकिन फिर भी जिलें में बैठे अधिकारी इन अधीक्षक को बचते नजर आते हैं ऐसा ही मामला आज परासिया विकासखंड के अंबाडा आदिवासी बालक आश्रम शाला में देखने को मिला जंहा सहायक आयुक्त के अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान आश्रम शाला में अत्याधिक गंदगी पाई गई, किचन एवं बच्चों के निवास कक्ष में गंदगी का अंबार लगा हुआ था, आश्रम शाला में दुर्गंध आ रही थी, हॉस्टल में गंदगी देखकर सहायक आयुक्त ने नाराजगी जताई।

छात्रावासीय अभिलेख भी अपूर्ण पाए गए….
आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा की लापरवाही इतनी अधिक है कि उसने छात्रावासीय अभिलेख में पूर्ण नहीं किया, छात्रावासीय अभिलेख भी अपूर्ण पायें गयें..जिसके बाद सहायक आयुक्त ने मौके पर अधीक्षक पर नाराजगी जहर की
छात्रों की काफी,पुस्तक बाथरूम में…?
जी हाँ हम बात कर रहे है छिंदवाड़ा जिलें में जनजातीय विभाग द्वारा संचालित एक आश्रम शाला की जंहा इन आदिवासी बच्चों को पढाने वाली कापी पुस्तक बाथरूम में पड़ी मिल रही हैं। जबकि जहां केंद्र एवं राज्य सरकार इन आदिवासी बच्चों को अच्छी से अच्छी सुविधा एंव बुनियादी शिक्षा मिल सके इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन इसके बाद भी जिलें के जनजातीय विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एवं आश्रम शालाओं में व्यवस्था सुधारने का नाम ले नहीं रही है ऐसा ही नजारा देखने को मिला परासिया विकासखंड के आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा में जहां बच्चों को पढ़ने के लिए आई पुस्तक, कापी बाथरूम में पड़ी मिली। ये हम नही खुद सहायक आयुक्त ने कारण बताओं नोटिस में उल्लेख किया है । तो आप समझ सकते हो कि इतनी बड़ी गलती के बाद भी सहायक आयुक्त ने अधीक्षक को बचाने के लिए सिर्फ कारण बताओं नोटिस जारी किया है..!

आश्रम शाला के बच्चों को नहीं आती गिनती, पहाड़ा…?
जिलें में जनजातीय विभाग द्वारा संचालित आदिवासी बालक आश्रम शाला में शिक्षा का स्तर बेहद ही कमजोर है, ऐसा ही आज परासिया ब्लॉक के आदिवासी बालक आश्रम शाला अंबाडा में सहायक आयुक्त सतेंद्र सिंह मरकाम के निरीक्षण में खुलासा हुआ जंहा देखने में मिला कि बच्चों में पहाड़ा, गिनती के अलावा बेसिक जानकारी की भी कमी है। जब सहायक आयुक्त ने बच्चों से प्रश्न पूछे। इस दौरान वह गिनती व पहाड़ा के साथ प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का नाम भी नहीं बता पाए। सहायक आयुक्त ने शिक्षा के गिरते स्तर पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आज आश्रम शाला की दो शिक्षिका को निलंबित कर दियें है।

आदिवासी बालक आश्रम शाला अंबाडा के अधीक्षक किशोर भारती को कारण बताओं नोटिस जारी…
सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग सत्येंद्र सिंह मरकाम की कार्य प्रणाली पर फिर सवाल खड़े होने लगें हैं। जानकारों का कहना है कि जब आश्रम शाला अधीक्षक की इतनी लापरवाही देखने के बाद भी आखिरकार सहायक आयुक्त ने अधीक्षक किशोर भारती को सिर्फ कारण बताओं नोटिस क्यों जारी किया जबकि आश्रम शाला अधीक्षक के मार्गदर्शन में संचालित होती है यदि अधीक्षक ही समय पर आश्रम शाला में नहीं रहता तो शिक्षक क्या करेंगे, क्योंकि अधीकांश समय ये आश्रम शाला चपरासियों के भरोसे संचालित होते है यहां पर कभी भी रात में अधीक्षक भी नहीं रहता है। जबकि जितनी जिम्मेदारी शिक्षक की होती है उतनी ही अधीक्षक की रहती है लेकिन निलंबन की कार्रवाई सिर्फ शिक्षिकाओं पर ही क्यों आश्रम शाला में शिक्षा का स्तर कमजोर होने की जिम्मेदारी अधीक्षक की भी होती है क्योंकि रात में अधीक्षक भी इन बच्चों को पढ़ने के लिए जिम्मेदार होता है तो फिर सहायक आयुक्त ने इन शिक्षकों पर ही कार्रवाई क्यों..! जबकि आश्रम शाला में गंदगी और बच्चों की पुस्तक, कापी बाथरूम में पड़ी मिली उसके जिम्मेदार कौन है?

सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग के निरीक्षण के बाद खुली पोल..
जब सहायक आयुक्त ने जब निरीक्षण किया तो आश्रम शाला की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। निरीक्षण के दौरान आश्रम शाला में चारों ओर गंदगी फैली हुई दिखाई दी, बच्चों की कापी,पुस्तक बाथरूम में मिली। बाथरूम में चारों ओर गंदगी फैली हुई थी। छात्रावास भवन में कही टाइल्स टूटी हुई दिखाई तो कहीं भवन का छत टूटा हुआ मिला,

दरअसल, सहायक आयुक्त सतेंद्र सिंह मरकाम शासन की तरफ से संचालित होने वाले हॉस्टल का निरीक्षण करने निकले थे। वह छात्र-छात्राओं को मिलने वाली आवश्यक मूलभूत सुविधाओ की हकीकत जानने पहुंचे थे। लेकिन जब सहायक आयुक्त अचानक आदिवासी बालक आश्रम शाला अंबाडा का निरीक्षण किया तो कई अनियमित्ताएं मिलीं।

