पुतंरा नर्सरी में मनरेगा के अंतर्गत आए 53 लाख रुपए का अधिकारी ने कर दिया बंदरबाट…?
प्रशासनिक अनियमितता:नर्सरी को संवारने हर साल लाखों रुपए खर्च,
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) जिलें के बिछुआ विकासखंड के पुन्तरा में उधानिकी विभाग द्वारा संचालित हो रही नर्सरी में इन दोनों प्रशासनिक अनियमितता के कारण नर्सरी उजाड़ रही हैं जबकि विभाग के द्वारा इन्हे सुरक्षित रखने के लिए लाखों रुपए का बजट मिल रहा है लेकिन यंहा पर बरसो से पदस्थ उद्यान अधिकारी की लापरवाही चरम पर है, यंहा पर उधान अधिकारी 15 दिन में एक बार आते जाते है यंहा पर मजदूरों के भरोसे यह नर्सरी संचालित हो रही है.. लेकिन जिलें बैठे उद्यानिकी उपसंचालक कभी इस ओर ध्यान नहीं देते है उन्हें तो सिर्फ अपनी कमिश्नर से मतलब है….
मजदूरों के नाम से लाखों का फर्जी भुगतान……
बिछुआ विकासखंड के पुन्तरा में उधान अधिकारी विगत आठ दस सालों से एक ही जगह पर पदस्थ है इनके पास विकासखंड उधानिकी अधिकारी एंव पुन्तरा नर्सरी का भी चार्ज इनके पास है, सूत्रों की जानकारी के अनुसार यंहा पर हर साल लाखों रुपये की हेराफेरी होती है लेकिन देखने वाला कोई नही…
पुन्तरा नर्सरी को संवारने हर साल लाखों रुपए खर्च,
मध्य प्रदेश सरकार हर साल इन नर्सरींयों को संवारने के लिए लाखों रुपए का बजट दे रही है लेकिन फिर भी विभागीय अधिकारी की लापरवाही एवं उदासीनता के कारण आज इन नर्सरींयों उजाड़ रही हैं, लेकिन उधान अधिकारी अपनी जेब भरने से पीछे नहीं रहे हैं फर्जी मजदूरों की हाजिरी दर्शाकर यहां पर लाखों का बजट निकलते हैं लेकिन फिर भी नर्सरींयों उजाड़ रही हैं

पुतंरा नर्सरी में मनरेगा के अंतर्गत आए 53 लाख रुपए का अधिकारी ने कर दिया बंदरबाट…?
जी हाँ हम बात कर रहे है बिछुआ विकासखंड के पुतंरा नर्सरी में आए मनरेगा योजना अंतर्गत 53 लाख रुपये कर उधान अधिकारी एस एल बोरकर एंव जिला में बैठे मनरेगा के अधिकारी के साथ मिलीभगत कर 53 लाख रुपये का बंदर बांट कर दिए जबकि नर्सरी में कोई काम नहीं हुआ है, यह पैसा 5 सालों तक नर्सरी की रखरखाव के लिए दिया गया था लेकिन देखकर नही लगता है नर्सरी में कोई काम हुआ है इसलिए इसकी जांच जिला पंचायत सीईओ एवं कलेक्टर महोदय को करना चाहिए जिसमें इतनी बड़ी हेरा फेरी का पर्दाफाश हो सके….
विभाग की नर्सरी में पौधे नष्ट हो रहे हैं….
उधानिकी विभाग द्वारा संचालित नर्सरी में पौधे नष्ट हो गए। पुन्तरा नर्सरी का नाम चल रहा है। लेकिन नर्सरी में पौधे ढूंढ़ने से नहीं मिलते हैं। हर साल नर्सरी को सजाने, संवारने और हरी भरी बनाए रखने के लिए लाखों रुपए खर्च होते हैं।
बिछुआ (पुन्तरा) नर्सरी में रोज करते हैं काम 8 मजदूर…
यही नहीं नर्सरी में पौधे लगाने, उठाने, सिंचाई करने आदि काम के लिए 8 मजदूर भी हैं। लेकिन मजदूर आते हैं तो लेकिन नर्सरी से संबंधित काम करते हुए नहीं देखे जाते हैं। जिसके चलते पूरी नर्सरी उजड़ गई। अब सिर्फ नाम की ही नर्सरी है

नर्सरी में आम एवं अन्य प्रजाति के पेड़ काट दिए गए….
बिछुआ विकासखंड के पुन्तरा में संचालित नर्सरी में विभाग के अधिकारी एंव कर्मचारियों के द्वारा नर्सरी के अंदर रोड बनाने के लिए आम के पेड़ काट दिए गए एवं अन्य प्रजाति के पेड़ भी यहां कटे देखे जा सकते हैं,उद्यानिकी विभाग के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार कई जनहितैषी योजनाएं किसानों के लिए चला रही है।

इसमें स्प्रिंकल सेट, पैक हाऊस, प्याज हाऊस, रोटाबेटर, पॉली हाऊस, नि:शुल्क पौधा वितरण, मसाला आदि। जिले में उद्यानिकी विभाग के अधीन जिलें में हर विकासखंड में नर्सरी हैं।
ये नर्सरी इसलिए बनाई गई हैं ताकि यहां नए-नए वैरायटी के पौधे तैयार कर निश्चित दर पर आमजन को उपलब्ध कराए जा सकें। पौधे बेचने से मिलने वाली राशि वहां के रखरखाव पर खर्च हो। । यहां तैयार होने वाले पौधों के बारे में किसानों को प्रशिक्षण दिया जा सके। लेकिन धीरे-धीरे बाहर से अरुचि वाले अधिकारी स्थानांतरित होकर आए और उन्होंने नर्सरी के पौधे तो बेच डाले लेकिन नए पौधे तैयार नहीं कराए।

सरकारी विभाग प्राइवेट नर्सरियों से ले रहे पौधे मप्र सरकार के निर्देश पर हर साल बड़े स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित होता है। इस पौधारोपण कार्यक्रम के लिए स्कूल, कॉलेज, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्राम पंचायतों, सरकारी भवनों, प्राइवेट एनजीओ आदि को पौधारोपण का लक्ष्य दिया जाता है। सरकारी विभाग पहले उद्यानिकी विभाग की नर्सरी से पौधे खरीदते थे। यह राशि सरकारी खजाने में जमा होती थी। लेकिन नर्सरी उजड़ जाने के कारण अब सरकारी विभागों को भी प्राइवेट नर्सरियों से पौधे खरीदने पड़ते हैं।

अब नहीं मिलते अच्छी वैरायटी के पौधे, प्राइवेट नर्सरी चमक रहीं
उद्यानिकी विभाग के अधिकारी एंव कर्मचारियों की लापरवाही से नर्सरी उजाड़ रही हैं, क्योंकि अधिकारी के द्वारा धीरे-धीरे नर्सरी की देखरेख पर गौर करना बंद हो गया। जितने पौधे थे, वे बेच दिए गए। उनके स्थान पर नए पौधे तैयार करना तो दूर, जो पेड़ बड़े हो चुके थे वे भी सूखकर नष्ट हो गए।
सरकारी नर्सरी उजड़ने से प्राइवेट नर्सरी संचालकों की अच्छी चांदी कट रही है। सरकारी नर्सरी में पौधे की रेट अधिकतम 20 रुपए होती थी। जबकि प्राइवेट नर्सरियों पर 20 रुपए से लेकर 500 रुपए में पौधे खरीदने के लिए लोग मजबूर हैं।

