शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला,.. जिला शिक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप..उच्च प्रभार प्राप्त करने के लिए शिक्षकों ने लगाई फर्जी डिग्री..

Chautha Sthambh

उच्च प्रभार प्राप्त करने के लिए शिक्षकों ने लगाई फर्जी डिग्री..

शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला,.. जिला शिक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप..

छिंदवाड़ा /पांडुरना (चौथा स्तंभ)जिला का शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। छिंदवाड़ा/पांढुर्ना जिलें में उच्च प्रभार प्राप्त करने शिक्षकों ने लगाई फर्जी अंकसूची! जिला शिक्षा अधिकारी ने बिना वेरिफिकेशन के 500शिक्षकों को उच्च प्रभार दे दिया गया। जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका संदेह के धेरे में नजर आ रही है जबकि सरकार द्वारा पहले ही इस यूनिवर्सिटी की डिग्री को अबैध और अमान्य धोषित किया जा चूका है फिर भी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन न करना जिला शिक्षा अधिकारी कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं

शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण बिषयों पर शिक्षा विभाग की बडी लापरवाही..?

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  • जी हाँ हम बात कर रहे है शिक्षा विभाग की लापरवाही से एक बार फिर प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर बडा सवाल खडा हो गया है।बार बार शिकायतों के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी की गंभीर लापरवाही को नजर अंदाज किया ही नही जा सकता है..

    हाईकोर्ट ने घोषित किया फर्जी विश्वविद्यालय…

    जबलपुर हाईकोर्ट और ग्वालियर खंडपीठ दोनों स्पष्ट कर दिया था। कि महर्षि योगी वैदिक विश्वविद्यालय की डिग्रियां अवैध है स्वयं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने 28 जुलाई 2025 को कहा था कि उक्त संस्थाओं के पास प्रवेश एवं परीक्षा केद्रों की मंजूरी ही नहीं है। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रधानपाठक से लेक्चरर तथा वर्ग 3 से वर्ग 1 के पदों पर प्रभारी बनाकर पदस्थ किया गया है।

    500से अधिक शिक्षकों ने लिया फर्जी डिग्री…?

    सूत्रों की जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा, सौसर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में महर्षि योगी देवक विश्वविद्यालय की फ्रेंचाइजी के मध्य से करीब 1000 लोगों को अवैध डिग्री जारी की गई है इसमें से लगभग 500 शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अतिरिक्त डिग्रियां इंग्लिश संस्कृत इसी फर्जी विश्वविद्यालय से किया है वहीं 10वीं एवं 12वीं जैसे परीक्षाएं देने वाले 500 से 700 छात्र अलग से है। परीक्षा केंद्रों पर खुलेआम गाइड, किताबों, मोबाइल फोन से गूगल सर्च कर उत्तर लिखने जैसी सुविधाएं परीक्षाथियों को उपलब्ध कराई गई थी

    जांच न करने से बढा डीईओ पर संदेह…

    जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा नहीं डिग्रियों का भौतिक सत्यापन कराया गया था और ना ही उनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से निरीक्षण नहीं किया गया। इससे इस पूरे फर्जीवाड़ा में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष संलिप्तता की आशंका और गहरा रही है अभी डिग्री वाले शिक्षकों को वरिष्ठ पदों का प्रभाव देने से न केवल शासन को गुमराह किया जा रहा।बल्कि छात्रों के भबिष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है… फर्जी डिग्री के आधार पर उच्च पद दे दिया जिसके बाद जिला शिक्षक पर
    गंभीर आरोप लगा है। इस मामले ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है क्योंकि यह वही विभाग है, जो हर साल “योग्यता और पारदर्शिता” के नाम पर भर्ती प्रक्रिया चलाता है, लेकिन अंदरखाने फर्जी प्रमाणपत्रों का खेल खुलेआम जारी है।

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