क्षतिग्रस्त, खंडरनुमा छात्रावास में गुजर बसर करने मजबूर आदिवासी समाज के विद्यार्थी….
आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा का मामला….
पिछले दो सालों में लाखों की स्वीकृत, नहीं हो पाई छात्रावास की मरम्मत….
छिंदवाड़ा( चौथा स्तंभ) जिले में जनजाति कर विभाग द्वारा संचालित आश्रम शाला में पढ़ाई के नाम पर आदिवासी समाज के छोटे बच्चों के भविष्य और जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।ऐसा ही मामला देखने को मिला परासिया विभागखंड के आदिवासी बालक आश्रम शाला अंबाडा में जंहा सिर्फ दो सालों से आश्रम शाला मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिया गया लेकिन आज भी जर्जर छठ के नीचे दहशत के साए में छोटे,छोटे नन्हे बच्चे आज भी यहां आश्रम शाला में पढ़ने के लिए मजबूर हैं, जनजाति विभाग द्वारा संचालित अंबाला आश्रम शाला में पढ़ाई के नाम पर आदिवासी समाज के छोटे बच्चों के भविष्य और जिंदगी के साथ सहायक आयुक्त एवं विभाग का इंजीनियर दीपक सरेयाम इन दिनों बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं… लेकिन इस भवन की हालत इतनी खस्ताहार हो चुकी है कि कभी भी धराशाई हो सकता है, क्योंकि आश्रम शाला भवन की छात्र सड़ चुकी है और कलम झुक गए हैं आलम यह है कि हाथ लगाने मात्र से छत का मलबा ढह जाता है। बाबूजूद इसके जर्जर हो चुके भवन में आश्रम शाला संचालित की जा रही है, आश्रम शाला में बच्चे पढ़ रहे हैं और रात्रि में भी यही बच्चे विश्राम करते हैं….

जनजाति कार्य विभाग आश्रम शाला अंबाडा की पोल खोलता यह तस्वीर…….
जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा के द्वारा विगत 3 वर्षों में छात्रावास एवं आश्रम शाला में मरम्मत के नाम पर 6 से 7 करोड रुपए पानी की तरह बहा दिया गया लेकिन आज भी कई छात्रावास एवं आश्रम शाला में सिर्फ कागजों पर मरम्मत हो रही है। जनजाति विभाग के अधिकारी से लेकर विभाग के इंजीनियर ठेकेदार मालामाल हो रहे हैं, लेकिन इन्हे रोकने वाला कोई नही है, सब की राजनीतिक पकड़ मजबूत है, इसलिए तो दर्जनों शिकायत होने के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। विभाग के इंजीनियर एंव विभाग के बाबूओं ठेकेदार की मिलीभगत से हर माह लाखों रुपए फर्जी बिलों के द्वारा भुगतान हो रहा है सिर्फ कागजों में काम हो रहा है धरातल पर कुछ नहीं, कुछ छात्रावासों में तो सिर्फ पुताई कर राशि निकाल ली जा रही है …

अधीक्षक एवं यंहा पदस्थ शिक्षकों के द्वारा कई बार विभाग को पत्राचार कर चुके हैं…

जब इस विषय में आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा में पदस्थ शिक्षिकाओं से बात की गई तो उनका कहना है कि सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा को भवन की दुर्दशा को लेकर 2020 से लगातार जनजाति विभाग को पत्राचार कर रहे हैं लेकिन अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी ने उसकी सुंध नहीं ली और इस भवन की मरम्मत के नाम से अब तक लाखों रुपये निकल ली गयें हर साल इंजीनियर एंव ठेकेदार यंहा आते है और थोड़ा बहुत कम कर कर यहां पर लाखों रुपए के बिल लगाकर राशि निकाली जाती है लेकिन भवन की हालत जस की तस बनी रहती है, इस भवन के नाम पर इतने पैसे निकल चुके हैं कि एक नए भवन बन चुका होता अभी तक, यंहा
ना खिडक़ी, दरवाजे ना पूर्ण रूप से प्लास्टर, रंग रोंगन के अभाव में खंडहर में रहने जैसी अनुभूति होती है

जिंदगी और मौत के बीच में पढ़ रहे आदिवासी नन्हे मुन्ने बच्चे…… कभी भी हो सकती है बड़ी घटना…?
जी हाँ हम बात कर रहे है छिंदवाड़ा जिलें के जनजाति विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एवं आश्रम शालाओं की जहां पर गरीब आदिवासी समाज के बच्चे रहकर यहां अपना भविष्य बनाने के लिए यहां रहते हैं, यदि लगता है इन गरीब आदिवासी बच्चों की विभाग के सहायक आयुक्त एंव जिले के कलेक्टर महोदय को कोई चिंता नही है…
आश्रम शाला भवन एंव छात्रावास भवन के नाम पर विभाग के इंजीनियर एंव ठेकेदार कर रहे मरम्मत के नाम पर लाखों की लूट…
इन दिनों सूत्रों की जानकारी के अनुसार जनजाति विभाग में विगत दो सालों से छात्रावास एंव आश्रम शाला भवन मरम्मत के नाम पर विभाग के इंजीनियर ठेकेदार एवं विभाग के बाबू एवं सहायक आयुक्त की मिली भगत से लाखों की लूट चल रही है, क्योंकि ठेकेदार एंव इंजीनियर के द्वारा ऐसे कई भवन है जिसकी कोई मरम्मत नहीं हुई और राशि निकल ली गई है और जिन छात्रावास एवं आश्रम शालाओं की मरम्मत हो रही है उसमें भी कोई गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है सिर्फ पुताई कर इन भवनों के नाम पर लाखों रुपये निकाल ले जा रहे हैं….

जनजाति कार्य विभाग पूरे जिले में संचालित छात्रावास एवं आश्रम शालाओं की चुनिंदा ठेकेदारों के द्वारा कर रहे मरम्मत…
जी हाँ इन दिनों जिलें में जनजाति विभाग में छात्रावास मरम्मत के नाम पर विभाग करोडो रुपये पानी की तरह बहा रहा है जिसमें विभाग के दस सालों से पदस्थ इंजीनियर सरेयाम एंव विभाग के बाबूओ कुछ ठेकेदार जो इन दिनों जनजातीय विभाग के छात्रावासों में मरम्मत का काम कर रहे है। इंजीनियर से मिली भगत कर बिना मूल्यांकन के ही ठेकेदारों को धड़ल्ले से भुगतान हो रहा है कभी इंजीनियर जाकर नहीं देखा कि कौन से छात्रावास में कितना काम हुआ है और कितना बाकी है उन्हें तो सिर्फ अपनी कमिश्नर से मतलब काम हो या ना हो यदि छिंदवाड़ा जिले के इन छात्रावासों की जांच हो जायें तो करोड़ों का घोटाला निकलेगा..?

