कृषि विज्ञान केन्द्र देलाखारी के वैज्ञानिक पहुंचे पातालकोट में भारिया जनजाति के बीच सिखाये प्राकृतिक खेती के गुर

Chautha Sthambh

कृषि विज्ञान केन्द्र देलाखारी के वैज्ञानिक पहुंचे पातालकोट में भारिया जनजाति के बीच

सिखाये प्राकृतिक खेती के गुर

छिन्दवाड़ा(चौथा स्तंभ) जिले के विकासखंड तामिया के कृषि विज्ञान केन्द्र देलाखारी के वैज्ञानिकों द्वारा आज पातालकोट के बीच स्थित ग्राम घानाकौड़िया की भारिया जनजाति की महिलाओं से संपर्क किया गया। कृषि विज्ञान केन्द देलाखारी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.एल. राऊत ने प्राकृतिक खेती की चर्चा कृषकों से की एवं उन्हें जीवामृत बनाने की विधि का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान अति पिछड़ी जनजाति के कृषकों को खेती से संबंधित जानकारियां प्रदान की गई एवं उनकी समस्याओं के देशी उपाय किसानों को बताये गये। बकरी पालन, मुर्गी पालन के लिए उन्नत आवास निर्माण के तरीकों की जानकारी प्रदान की गई, ताकि कृषकों को पशु-पक्षियों से अधिक आमदनी हो सके। कार्यक्रम में परार्थ समिति तामिया के श्री धारासिंह डेहरिया एवं श्री प्रकाश धुर्वे द्वारा सहयोग प्रदान किया गया एवं जीवामृत के उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई।

  प्राकृतिक खेती के अंतर्गत कृषकों को अपनी जैविक दवाईयां अपने आसपास के संशाधनों से बनाने का तरीका बताया गया, जिससे खेती में लागत को कम किया जा सके। कार्यक्रम में केन्द्र के कम्प्यूटर विशेषज्ञ श्री राकेश मेश्राम द्वारा सहयोग प्रदान किया गया एवं जीवामृत बनाने की विधि की फिल्म का निर्माण किया गया, जिसे केन्द्र के यूट्यूब चैनल पर डाला जायेगा, जिससे अन्य कृषक भी जीवामृत बनाना सीख सकेंगे।
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