शिक्षक को स्कूल में पढने की जगह करा रहे, न्यायालय कार्य…?
जनजाति कार्य विभाग में दर्जनों बाबू पदस्थ लेकिन किसी को नहीं आता न्यायालयीन कार्य..?
बरसों से बच्चों के भविष्य खिलवाड़ कर रहे जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त….
जनजाति विभाग के अधिकारी की अनदेखी से 15साल से शिक्षक अटैचमेंट पर कर रहा बाबूगिरी…?
सहायक आयुक्त जनजाति विभाग कार्यालय में दर्जनों बाबू फिर भी ले रहे शिक्षक का सहारा…!
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिलें के जनजाति कार्य विभाग इन दिनों सुर्खियों में है। यहां आए दिनों नए-नए मामले देखने को मिलते हैं ऐसा ही एक मामला इन दिनों लोगों के बीच चर्चाओं का विषय बना है कि आखिर इतने सालों से बच्चों की पढाई छोड़ कर आखिर शिक्षक सुभाष देशपांडे से सहायक आयुक्त क्यों बाबूगिरी करा रहे है। क्या जनजाति विभाग के किसी और बाबू से न्यायालयीन कार्य क्यों नहीं करा रहे है।
आयुक्त जनजातीय विभाग भोपाल ने सभी अटैचमेंट समाप्त करने के दिए थे आदेश….
आयुक्त जनजाति कार्य विभाग भोपाल ने जिलें में पदस्थ सभी शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त कर दिए थे जो बरसों से कार्यालय में बाबू गिरी कर रहे थे। उनका अटैचमेंट समाप्त कर उनकी मूल शाला के स्कूल में उन्हें पढ़ने के लिए वापस कर दिया गया था। लेकिन क्या ये आदेश सुभाष देशपांडे पर लागू नही होता है..
शिक्षक सुभाष देशपांडे 15 सालों से स्कूल छोड कर रहा बाबूगिरी…?
जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ शिक्षक सुभाष देशपांडे लगभग 15 सालों से जिले के सहायक आयुक्त कार्यालय में बाबू गिरी कर रहा है, सूत्रों की जानकारी के अनुसार 15 सालों से सहायक आयुक्त कार्यालय में पदस्थ शिक्षक सुभाष देशपांडे ने हेराफेरी कर महाराष्ट्र के पुणे में 70लाख रुपये का एक बंगला आपने बेटे के नाम से खरीदा है, कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति विभाग के अधिकांश विभाग का काम सुभाष देशपांडे ही देखते है, ये बाबूजी बिना लेनदेन के किसी का काम नही करते है चाहे पेशंन का काम हो या अनुकंपा नियुक्ति का काम हो या न्यायालयीन काम सब में पहले लोगों से मोटी रकम बसूलने के बाद ही सुभाष बाबू जी काम करते हैं…
शिक्षकों के ट्रांसफर एवं अधीक्षक बनने के नाम पर लाखों कमाए….
जानकारों की मने तो इस वर्ष जो शिक्षकों के जनजाति विभाग में शिक्षके ट्रांसफर हुए हैं उसमें बाबूजी ने लाखों रुपए का लेनदेन किया गया है, कई शिक्षक जिनका मनचाही जग में ट्रांसफर नहीं हुआ और उन्हें मनचाही जगह चाहिए था उनसे भी खूब मोटी रकम की वसूली की गई ऐसे आज जिले में दर्जनों शिक्षक मिलेंगे जिनका ट्रांसफर और कहीं हुआ लेकिन सेटिंग कर उन्हें अपनी मनचाही जगह में पदस्थ हो गयें..
सुभाष देशपांडे के धर से चलता है जनजाति विभाग का अधिकांश काम..?
सूत्रों की जानकारी के अनुसार विगत बरसों से जनजाति कार्य विभाग में पदस्थ शिक्षक बनाम बाबू विभाग का अधिकांश काम अपने घर से ही करते हैं चाहे किसी मास्टर का ट्रांसफर हो या किसी छात्रावास में अधीक्षक की नियुक्ति का आदेश हो सब काम सुभाष देशपांडे के घर से ही उनके आदेश बनते हैं। इनके धर से रातों रात आदेश बन जाते है और जब मर्जी होती है जिले के सहायक आयुक्त कार्यालय के आवक- जावक के रजिस्टर में इसकी एंट्री कर दी जाती है

आयुक्त जनजाति कार्य विभाग भोपाल के आदेश का इन पर नहीं होता असर….
जिलें के जनजाति कार्य विभाग में एक ऐसा शिक्षक है जो मौखिक अटैचमेंट पर बरसों से जिला मुख्यालय में बाबूगिरी कर रहे, इन पर आयुक्त जनजाति कार्य विभाग भोपाल के आदेश भी लागू नही होता है, इसलिए तो
15 सालों में बाबूगिरी आखिर कैसे कर रहे है, लोगो का कहना है कि क्या सुभाष देशपांडे पर जनजाति कार्य विभाग के नियम कानून लागू नहीं होते है..
वर्ष 2014 से सिल्लेवानी बालक आश्रम शाला में थे पदस्थ… लेकिन काम करते थे, कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति विभाग के जिला मुख्यालय में…?
इन दिनों जिलें के जनजाति विभाग सहायक आयुक्त की मेहरबानी शिक्षक सुभाष देशपांडे पर देखी जा सकती है जिसका नतीजा है कि 10 से 15 साल से सिल्लेवानी आदिवासी बालक आश्रम में पदस्थ शिक्षक सुभाष देशपांडे का अटैचमेंट को समाप्त करते हुए हाई स्कूल कटकूही कर दिया गया लेकिन पिछले 10से 15 सालों से शिक्षक ने स्कूल का मुंह नही देखा होगा, जबकि कई स्कूल में आज भी शिक्षक विहीन है.. लेकिन इस वर्ष सहायक आयुक्त सतेंद्र मरकाम ने सिर्फ दिखावा के लिए सुबह देश पांडे का ट्रांसफर हाई स्कूल कटकूही में कर दिया गया है। लेकिन इनके आदेश में लेख किया गया है कि सुभाष देशपांडे शैक्षणिक कार्य के साथ-साथ न्यायालयीन काम भी देखेंगे, महोदय जी ये कैसा आदेश है, यदि आपको यंहा से इन्हे हटाना नहीं था तो सिर्फ दिखावे के लिए इन्हें कटकूही हाई स्कूल में पदस्थ कर दिया गया लेकिन सुभाष देशपांडे ने आज तक स्कूल नहीं गयें है…
बच्चों को पढाने की जिम्मेदारी छोड़ गुरुजी (सुभाष देशपांडे) को रास आ रहा बाबू गिरी…
नियमों का पालन कराने वाले ही नियमों की कर रहे अनदेखी..
जनजातीय विभाग के स्कूलों में पहले ही शिक्षकों की कमी चल रही है, इसके बाद भी सुभाष देशपांडे सहायक शिक्षक को बच्चों को पढाने की बजाय सहायक आयुक्त कार्यालय में बाबू गिरी में लगे हुए है, खास बात ये है कि नियमों का पालन कराने वालें सहायक आयुक्त खुद ही उच्च अधिकारियों के आदेश का पालन नहीं कर रहे है , विधालय में छात्रों को पढाने की जिम्मेदारी छोड पिछले कई बरसों से शिक्षक सहायक आयुक्त कार्यालय में बाबू गिरी का कार्य कर रहे.. जनजाति विभाग द्वारा आदेश जारी कर ऐसे अध्यापकों को उनके मूल पद पर भेज कर उनकी सूचना आयुक्त कार्यालय जनजाति कार्य विभाग भोपाल को भेजना तलब किया है। इसके बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारी विभागीय आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
बच्चों के भविष्य के साथ किया जा रहा खिलवाड़…
सुभाष देशपांडे सहायक शिक्षक कटकूही स्कूल में कार्यरत है लेकिन छात्रों को पढाने की बजह वो सहायक आयुक्त कार्यालय में बाबू गिरी कर रहे हैं, सूत्रों की जानकारी के अनुसार करीब 12/15 सालों से अटैचमेंट (मौखिक)में ही लगातार सहायक आयुक्त कार्यालय में बाबू गिरी कर रहे है

