उत्कृष्ट बालक छात्रावास हर्रई में बच्चों से भवन की बिल्डिंग की छत पर कर रहे अधीक्षक काम….
जिलें के छात्रावास में ऐसी धटना होने के बाद भी सबक नहीं ले रहा विभाग….बच्चों का अधीक्षक कर रहे शोषण..?
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) जिलें के हर्रई मुख्यालय में जनजाति विभाग द्वारा संचालित आदिवासी बालक उत्कृष्ट छात्रावास में मासूमों की जान से खिलवाड़ करते देखे गयें है
आदिवासी बच्चों से छात्रावास भवन की छत में चढ़कर करा रहे काम..!
जिले के हर्रई में स्थित आदिवासी बालक उत्कृष्ट छात्रावास में रहने वाले मासूम बच्चों की जान जोखिम में डालने का वीडियो सामने आया है । वीडियो में दिख रहा है कि अधीक्षक छड़ी के दबाव में बच्चों को डरा-धमकाकर छात्रावास की छत पर चढ़ा कर उनसे काम करवा रहे हैं। इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वीडियो में अधीक्षक काशीराम डेहरिया पिछले कुछ समय से छात्रावास के बच्चों से अपनी निजी सेवा और अन्य छात्रावास के अन्य छोटे-मोटे काम करवाते हैं। जिसका वीडियो किसी ने बना लिया मिली जानकारी अनुसार अधीक्षक बच्चों को छड़ी दिखाकर डराते हैं और उन्हें छात्रावास की छत पर चढ़कर सफाई और अन्य काम करने के लिए मजबूर करते हैं। इस दौरान बच्चों की सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे किसी भी समय कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। यह घटना न केवल बच्चों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह बाल श्रम कानून और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों का भी सीधा-सीधा उल्लंघन है। इन कानूनों के तहत किसी भी बच्चे को ऐसे किसी भी काम में नहीं लगाया जा सकता है जो उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास के लिए हानिकारक हो। इसके अलावा, शिक्षा का अधिकार अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों का मुख्य कार्य पढ़ाई करना है और उन्हें किसी भी ऐसे कार्य में शामिल नहीं किया जाना चाहिए जो उनकी शिक्षा में बाधा उत्पन्न करे।

जिलें में ऐसे कई धटना होने के बाद भी सहायक आयुक्त अधीक्षक पर मेहरबान..?
हालांकि, यह घटना जिलें के आदिवासी छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर चल रही लापरवाही की एक और बानगी प्रस्तुत करती है। इससे पहले भी जिलें के कई छात्रावासों से बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, खराब भोजन और अव्यवस्था की खबरें आती रही हैं।

नियम क्या कहते हैं?
किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015: यह कानून बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता को अपराध मानता है। किसी बच्चे को जानबूझकर ऐसे किसी कार्य में लगाना जिससे उसे शारीरिक या मानसिक पीड़ा हो, इस अधिनियम के तहत दंडनीय है।
बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986
यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी जोखिम भरे काम में लगाने पर रोक लगाता है।
मध्य प्रदेश आदिवासी छात्रावास नियम: इन नियमों में छात्रावास अधीक्षकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का स्पष्ट उल्लेख है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना सर्वोपरि है।
छात्रावास अधीक्षक ने बताया…
छात्रावास अधीक्षक काशीराम डेहरिया का कहना है कि अभी सेवा पखवाड़ा चल रहा है,इसलिए बच्चों से काम करा रहे है,उसके बाद उन्होंने फोन बंद कर लिया, लेकिन साहब ये कैसा सेवा पखवाड़ा जिसमें बच्चों की जिदंगी को खतरे डाला जा रहा है और भवन की छत में चढ़कर उनसे काम कराया जा रहा है..

