अनुसूचित जाति जन जाती सीनियर बालक छात्रावास अमरवाड़ा में मासूमों से बिना सुरक्षा उपकरणों के कराई गई नाली ग्राउंड की सफाई, नियमों की अनदेखी….
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) जिले के अमरवाड़ा मुख्यालय में संचालित अनुसूचित जाति ज जा सीनियर बालक छात्रावास में स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान, अमरवाड़ा के एक छात्रावास में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि छात्रावास प्रबंधन ने मासूम छात्रों से बिना किसी सुरक्षा उपकरण, जैसे कि मास्क और बिना दस्ताने के गंदी नाली एवं ग्राउंड की सफाई करते छात्रों को देखा जा सकता है। यह पूरी घटना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य को सीधे खतरे में डालने वाला कृत्य भी है।

क्या है पूरा मामला….
वीडियो में दिख रहा है कि अमरवाड़ा के अनुसूचित जाति ज जा सीनियर बालक छात्रावास में प्रशासन के ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ के तहत अभियान में छात्रावास प्रबंधन द्वारा छात्रों को शामिल किया।इस दौरान, उन्हें छात्रावास परिसर की गंदी नालियों की सफाई करने का काम सौंपा गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छोटे बच्चे नंगे हाथों और बिना मास्क के नाली के अंदर का कचरा और गंदगी निकाल रहे हैं।
यह गतिविधि बेहद खतरनाक है, क्योंकि गंदी नालियों में कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, और संक्रमण फैलाने वाले कीटाणु पनपते हैं। बिना ग्लव्स के इस तरह का काम करने से बच्चों को त्वचा संबंधी रोग और गंभीर संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसी तरह, मास्क न पहनने से वे दूषित हवा में मौजूद रोगाणुओं को सीधे सांस के जरिए अंदर ले सकते हैं, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।

नियमों की अनदेखी और कानूनी सवाल…
स्वच्छता अभियान एक सराहनीय पहल है, लेकिन इसे हमेशा सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए ही चलाया जाना चाहिए। बच्चों से बिना सुरक्षित सामग्री के बिना इस तरह का काम करवाना सीधे तौर पर बाल श्रम कानूनों और स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। यह कृत्य छात्रावास प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाता है और यह सवाल उठाता है कि क्या बच्चों की सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है।

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस घटना का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस तरह की घटनाओं से भविष्य में बचने के लिए सभी शैक्षणिक और आवासीय संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी करने की आवश्यकता है।

इस घटना पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कड़ी नाराजगी जताई है और मांग की है कि जिम्मेदार लोगों के ऊपर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए
रिपोर्ट -ठा. रामकुमार राजपूत

