कंबल वाले बाबा के शिविर में तेल और चूर्ण के नाम पर लाखों की लूट…

Chautha Sthambh

कंबल उढ़ाकर गंभीर बीमारियों को दूर करने का करते हैं दावा

सिवनी जिले के छपारा थाना क्षेत्र अंतर्गत बंजारी मंदिर परिसर में 4 दिनों का लगा शिविर

आस्था और अंधविश्वास के चक्कर में उमड़ रही हजारों मरीजों की भीड़

दूसरे प्रदेशों से भी आ रहे गंभीर बीमारी और लकवा से पीड़ित मरीज

शिविर में भारी अव्यवस्था का आलम, खुले आसमान के नीचे गंभीर बीमारी से पीड़ित तड़पते हजारों मरीज

650 रुपए का तेल और 620 रुपये का बेच रहे चूर्ण

शिविर में तेल और चूर्ण बेचने के 5 से 6 काउंटर

एक काउंटर में सुबह से शाम तक दो से ढाई लाख रुपए का बेचा जा रहा तेल और चूर्ण

आखिर लखनादौन SDM ने अंधविश्वास के शिविर लगाने की क्यों दी अनुमति?

रोजाना उमड़ रही 5 से 10 हजार मरीजों की भीड़

4 दिनों के शिविर में सिर्फ तेल और चूर्ण बेचकर बाबा ने कमाए 40 से 50 लाख रुपए

अधिवक्ता उमेश रजक ने कंबल वाले बाबा के खिलाफ लखनादौन एसडीएम को लिखित में की शिकायत

सिवनी (चौथा स्तंभ)

आज हम आपको ऐसी खबर दिखाने जा रहे हैं जिसको देखने और सुनने के बाद आप भी हैरान रह जाएंगे। जी हां दरअसल मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के छपारा थाना क्षेत्र अंतर्गत NH-44 पर बंजारी मंदिर में कंबल वाले बाबा ने अपना 4 दिनों का शिविर लगाया था।
इस शिविर में कंबल वाले बाबा गंभीर से गंभीर बीमारी को सिर्फ कंबल उढ़ाकर ठीक करने का दवा कर रहे हैं। हमारी टीम ने शिविर में पहुंचकर पड़ताल की तो सारा खेल खुले रूप से सामने आ गया। दरअसल कंबल वाले बाबा कंबल उढ़ाकर लकवा जैसी घातक बीमारी वाले मरीजों को उठाकर खड़े करने का दावा करते हुए हमारे कैमरे में कैद हुए। लेकिन जब हमने बहुत से मरीजों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्हें किसी भी तरह का आराम नहीं मिला है वहीं कुछ लोगों ने यह भी बताया कि कुछ आराम मिला है।

इस शिविर में सिवनी जिले के ग्रामीण अंचलों सहित अन्य प्रदेशों के भी हजारों मरीज अपना इलाज कराने पहुंचे। शिविर में अवस्थाओं का आलम यह था कि भरी बरसात में खुले आसमान के नीचे हजारों लोग यहां-वहां पड़े हुए दिखाई दिए कुछ मरीज तो इतनी गंभीर हालत में आए हुए थे की बयां नहीं किया जा सकता है।

लाखों रुपए के तेल और चूर्ण बेचने का चला खेल

हमने जब शिविर में चारों नजरें दौड़ाई तो लगभग 5 से 6 काउंटर हमें कंबल वाले बाबा के लगे हुए दिखाई दिए जहां से मरीजों को तेल और चूर्ण 1370 रुपए में बेचा जा रहा था। इस तेल और चूर्ण का किसी भी मरीज को कोई बिल भी नहीं दिया गया। मतलब की सीधे तौर पर लाखों रुपए की जीएसटी और इनकम टैक्स की चोरी सामने दिखाई दी। हमने एक काउंटर पर बैठे व्यक्ति से सवाल जवाब किया तो उसने बताया कि उसे एक हजार रुपए प्रतिदिन तनख्वाह मिलती हैं। और प्रतिदिन सुबह से शाम तक एक काउंटर में दो से ढाई लाख रुपए तक का तेल और चूर्ण बेचा जाता है। मतलब कि प्रतिदिन पांच काउंटर से 8 से 10 लाख रुपए से कमाए गए। इस तरह चार दिनों के शिविर में 40 से 50 लाख रुपए का सिर्फ तेल और चूर्ण बेचकर कंबल वाले बाबा मालामाल होकर अपने दूसरे गंतव्य की ओर रवाना हो गए। वहीं इस कंबल वाले बाबा की एक अधिवक्ता उमेश गोलू रजक ने लखनादौन SDM को एक लिखित शिकायत करते हुए कार्रवाई करने की बात कही है।

सवालों के घेरे में प्रशासन

कंबल वाले बाबा के शिविर से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि लखनादौन SDM ने चार दिनों तक शिविर लगाने की अनुमति कंबल वाले बाबा को दी थी। सवाल यह है क्या प्रशासन को यह संज्ञान में नहीं था कि कंबल वाले बाबा का शिविर कैसे संचालित होता है और वहां पर कौन-कौन सी गतिविधियां होती हैं। हजारों मरीजों से तेल और चूर्ण के नाम पर लाखों रुपए की लूट सहित अंध विश्वास और ढोंग फैलाने वाले कंबल वाले बाबा को प्रशासन ने ऐसी अनुमति दी तो क्यों दी?

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