राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन के जिम्मेदार बने स्कूलों के लुटेरे,

Chautha Sthambh

वर्ष 2022-23 में भी हाईस्कूल मरम्मत के नाम पर हुई थी भारी लूट…

नेताजी का नाम लेकर लेखापाल कर रहा काम…

छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) जिलें के शिक्षा विभाग में इन दिनों लूट मची हुई है, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन की अहम जिम्मेदारी होती है। विभाग द्वारा होने वाले निर्माण कार्यों और खरीदी में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन यानि रमसा का ही महत्वपूर्ण रोल होता है लेकिन इन दिनों रमसा में बैठे जिम्मेदार सरकारी स्कूलों के लुटेरे बन गए हैं।

शिक्षा विभाग में वसूली करने वाला धनकुबेर….

आलम यह है कि कहां से खरीदी होना है कौन ठेकेदार काम करेगा। किसके टेंडर भरे जाएंगे यह पूरा काम रमसा में बैठे एक जिम्मेदार और लेखापाल तय कर रहे हैं। इसमें भी लेखापाल अपने राजनैतिक रसूख के चलते शिक्षा विभाग में वसूली करने वाला धनकुबेर बना हुआ है।

नेताजी का नाम लेकर जिले के सभी प्राचार्यों को चमकाया जाता है…

उक्त विवादित लेखापाल के द्वारा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन के अंतर्गत होने वाले सभी काम अपनी मनमर्जी के मुताबिक किए जा रहे हैं एक नेताजी का नाम लेकर जिले के सभी प्राचार्यों को चमकाया जा रहा है दरअसल ये लेखापाल कर्मचारी संगठन में भी खासा रसूख रखते हैं यही वजह है कि अब शिक्षा विभाग के अंतर्गत होने वाले सभी काम ये अपनी मनमर्जी के मुताबिक ही कर रहे हैं।

चहेतों को पहुंचा रहे फायदा…

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन के अंतर्गत होने वाले काम अथवा खरीदी जैम पोर्टल के जरिए होती है। इसमें भी विवादित लेखापाल द्वारा अपनी मनमर्जी के मुताबिक ही चहेतों को लाभ पहुंचाने का पूरा काम किया जा रहा है। आलम यह है कि स्कूल के प्राचार्य सिर्फ रबर स्टैप बने हुए हैं। उनके खाते में रुपए जरूर आ रहे है लेकिन किस ठेकेदार से खरीदी करना है, क्या खरीदना है, उक्त सामान गुणवत्ता क्या होगी। यह प्राचार्य नहीं रमसा के इस लेखापाल द्वारा तय किया जा रहा है। कई प्राचार्यों पर अपने चहेते लोगों से खरीदी करने का भी उक्त लेखापाल द्वारा दबाव बनाए जाने की खबरें अक्सर सामने आती रही है।

रिश्तेदार की दुकान से ही लेना होगा माल

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन में प्रतिनियुक्ति पर बैठे हुए लेखापाल द्वारा जमकर कमाई की जा रही है। पिछले दिनों शिथा विभाग के अंतर्गत प्रत्येक सरकारी स्कूलों में इलेक्ट्रिक आइटम खरीदने के लिए 20 हजार रुपए तक का बजट आया था उस समय रमसा से सभी प्राचार्यों को अनिवार्य निर्देश मिले थे कि इलेक्ट्रिक आइटम उक्त लेखापाल के भाई की दुकान से ही खरीदना होगा तभी बिलों का भुगतान होगा अधिकतर स्कूलों को मजबूरी में उक्त दुकान से इलेक्ट्रिक आइटम खरीदना पड़ा।

बोहनाखैरी में पदस्थापना, रमसा में काम…

शिक्षा विभाग में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन सेक्टर काफी मलाईदार माना जाता है रमसा की कमान फिलहाल एसएएफ के प्रभारी प्राचार्य संभाल रहे हैं। इनके साथ ही बोहनाखैरी स्कूल के लेखापाल को यहां पर करीब दो साल से अटैच किया गया है। अभी तक इनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त नहीं हुई है जबकि रमसा की कमान को लेकर भी पिछले दिनों कुछ प्राचायों के नाम सामने आए थे जिन्हें जिम्मेदारी मिल सकती थी लेकिन सूत्रों की माने तो इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। दरअसल भोपाल से सेटिंग होने की बात सामने आ रही है।

हाईस्कूल भवनों की मरम्मत व पुताई के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी…

जिले में वर्ष 2022-23 में हाईस्कूल भवनों की मरम्मत व पुताई के नाम पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा दिया था,स्कूलों की मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई है। और सीधे ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया था..

राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के तहत जिलें करोड़ की राशि से जिले के हाईस्कूलों के भवनों की मरम्मत के लिए दिए गयें थे। जिले के हाई स्कूल भवन की मरम्मत कराने के कोई निविदा नहीं निकल गई और सीधे ठेकेदार के काम दे दिया गया, रमसा में बैठा लेखापाल ने आपने इन्दौर के मित्र ठेकेदार को जिलें के सभी हाई स्कूलों की मरम्मत का कार्य वर्ष 2023 से 2024 के बीच कराया गया। लेकिन स्थिति यह है कि मरम्मत के नाम पर छतों पर सिर्फ सीमेंट का घोल डाला गया है, पुताई ऐसी कि पुराना लिखा हुआ भी दिखाई दे रहा है। जिन स्कूलों की मरम्मत की गई, उनमें दरार पड़ रही हैं।जिसका उदाहरण चौरई ब्लॉक के स्कूल में देखने को मिल जायेंगे,जिलें के कई स्कूल के प्राचार्य से तो बिना मरम्मत एंव पुताई के ठेकेदार के नाम से चैक ले लिया गया था शिकायत के बाद भी मामला दवा दिया गया था..

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