पर्यटन ग्रामों के होम स्टे देश-प्रदेश के पर्यटकों को खूब भा रहे हैं…

Chautha Sthambh


पर्यटकों को भा रहे हैं होम स्टे
छिंदवाड़ा जिले में सबसे अधिक होम स्टे शुरू, गांवों से पलायन रुक रहा, युवाओं में उच्च शिक्षा की ललक बढ़ी

छिन्दवाड़ा(चौथा स्तंभ) मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित किए गए छिन्दवाड़ा जिले के पर्यटन ग्रामों के होम स्टे देश-प्रदेश के पर्यटकों को खूब भा रहे हैं। हर वीकेंड यहां सैलानियों की अच्छी खासी आवाजाही हो रही है। पर्यटक गांवों में रुककर न सिर्फ ग्रामीण जीवन का अनुभव ले रहे हैं, बल्कि जनजातीय संस्कृति, खानपान और परंपरागत गतिविधियों से भी जुड़ रहे हैं।
सतपुड़ा की वादियों के बीच बसे इन पर्यटन ग्रामों में बने होम स्टे परंपरा और आधुनिक सुविधाओं का संगम हैं। यहां आने वाले पर्यटक खुद को प्रकृति की गोद में पाते हैं। जिले के 12 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित किया गया है, जहां 100 से अधिक होम स्टे तैयार किए जाने हैं। इनमें से 7 गांवों – सावरवानी, देवगढ़, काजरा, गुमतरा, चोपना, चिमटीपुर और धूसावानी – में 36 होम स्टे पर्यटकों के लिए खोले जा चुके हैं।


ग्राम में आने वाले पर्यटकों को परंपरा और आधुनिकता का संतुलित अनुभव मिले और ग्रामीणों को इसका प्रत्यक्ष लाभ भी हो

गांव में रुका पलायन, बढ़ा शिक्षा का रुझान- होम स्टे खुलने से ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिलने लगा है। स्थानीय स्तर पर आय बढ़ने से आदिवासी परिवारों का पलायन रुक गया है। वहीं गांव की तरक्की देखकर अब युवा उच्च शिक्षा की ओर भी बढ़ रहे हैं, ताकि वे पर्यटन से जुड़ी संभावनाओं का और बेहतर लाभ उठा सकें।

ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार- पर्यटन ग्रामों में आने वाले सैलानी गांव में उगाई सब्जियों और अनाज का सेवन करते हैं। गाइड के रूप में गांव के युवा, बैलगाड़ी संचालन, लोक नृत्य और भजन मंडली की प्रस्तुति देने वाले ग्रामीणों को सीधे पर्यटकों से भुगतान मिलता है। इससे गांवों में अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

हर पर्यटन ग्राम की अपनी पहचान- छिंदवाड़ा का हर पर्यटन ग्राम अपनी विशेषता लिए हुए है।


चोपना – साल के जंगल और देवना नदी का अद्भुत नजारा।
चिमटीपुर – पातालकोट की रहस्यमयी वादियां।
गुमतरा – ऑफ-बीट डेस्टिनेशन, पेंच नेशनल पार्क के करीब।
देवगढ़ – गोंड शासन का ऐतिहासिक किला।
काजरा – मंधान डेम के बैक वॉटर का सौंदर्य।
धूसावानी – आम के बगीचे और चौरागढ़ महादेव का दृश्य।

चोपना और चिमटीपुर हुए गुलजार– भोपाल मार्ग पर साल के जंगल के बीच बसे चोपना और पातालकोट के चिमटीपुर गांव के होम स्टे हाल ही में पर्यटकों से गुलजार रहे। भोपाल व इंदौर से आए परिवारों ने यहां ग्रामीण परिवेश को करीब से जिया। गाय का दूध दुहना, बैलगाड़ी की सवारी, ट्रैकिंग और लोकनृत्य-लोकसंगीत जैसी गतिविधियों ने उन्हें खासा लुभाया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान- सावरवानी के होम स्टे को 2023 में इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म (ICRT) द्वारा रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म अवार्ड्स के लिए चुना गया था। वहीं 2024 में इसे पर्यटन मंत्रालय द्वारा सर्वश्रेष्ठ टूरिज्म विलेज अवार्ड प्रदान किया गया।

धूसावानी से दिखता चौरागढ़– धूसावानी गांव के होम स्टे परिसर से पचमढ़ी का प्रसिद्ध चौरागढ़ महादेव मंदिर साफ दिखाई देता है। यहां आम के बगीचे, झरने और घाटियों में फैला कोहरा पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है। बरसात और ठंड के मौसम में यहां का नजारा बेहद रोमांचक होता है।

होम स्टे की खासियत- होम स्टे में पर्यटक गाय का दूध दुहने, बैलों को खिलाने, खेत के छोटे कामों में हाथ बंटाने और पहाड़ियों पर ट्रैकिंग करने जैसे अनुभव जीते हैं। ढोलक-मानजीरे के साथ भजन और कर्मा नृत्य मंडलियों की प्रस्तुति भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। कई परिवार यहां बार-बार लौटकर आ रहे हैं।
“गांव की पगडंडियों पर जो सुकून है,
वो शहर की गलियों में कहां।”

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