जनजातीय विभाग में अफसरों पर गंभीर आरोप,
मरम्मत के काम में लाखों का हेरफेर, ठेकेदार को बिना काम के कर रहे भुगतान…
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ)
जिलें के जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी, इंजीनियर, एंव निर्माण शाखा के बाबू पर गंभीर आरोप लग रहे है, सूत्रों की जानकारी के अनुसार इन दिनों जनजातीय विभाग के अधिकारी, इंजीनियर, बाबू एंव ठेकेदार खुलकर भ्रष्टाचार कर रहे है, छात्रावासों में बिना मरम्मत कार्य के फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपयें निकले जा रहे है..!

भंडारकुंड एवं मोहखेंड छात्रावास में बिना कार्य के निकल लिए गए लाखों रुपए….
जी हाँ इन दिनों जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा में अधिकारी की मिलीभगत से ठेकेदार एंव बाबू लाखों रुपये बिना छात्रावास में मरम्मत कार्य कराये निकल रहे है ऐसा ही देखने को मिला मोहखेड के आदिवासी बालक छात्रावास में जंहा वर्ष 2024 -25 में कोई काम नहीं कराया गया है और मोहखेड छात्रावास के नाम पर ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया है , सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है..
अधीक्षक का कहना है मेरे छात्रावास में कोई मरम्मत नहीं हुई…
जब इस बिषय में आदिवासी बालक छात्रावास मोहखेड के अधीक्षक राने जी से पूछा गया तो उनका कहना है कि मेरे छात्रावास में वर्ष 2023-24एंव 25 में कोई भी मरम्मत का काम कोई ठेकेदार ने नहीं किया है, ठेकेदार को कैसे भुगतान हुआ मुझे नहीं मालूम..?

आदिवासी कान्या छात्रावास भंडारकुंड में भी निकल गई मरम्मत के नाम पर राशि….
ऐसा ही मामला मोहखेड ब्लॉक के भंडारकुंड कन्या छात्रावास में भी देखने को मिला जंहा कि अधीक्षिका एंव शिक्षक का कहना है कि मेरे यंहा वर्ष 2024- 25 में कोई भी मरम्मत का काम नहीं हुआ है, मेरे छात्रावास के नाम पर ठेकेदार को 3.50लाख का भुगतान कैसे हुआ मुझे नहीं मालूम है और मेरे यंहा कोई ठेकेदार ने काम नहीं किया है…

तामिया ब्लॉक के आदिवासी बालक छात्रावास कुसीढाना में लाखों की हेराफेरी….
जनजाति कार्य विभाग के अधिकारी छात्रावास में मरम्मत के नाम पर लाखों की हेराफेरी कर रहे है लेकिन बोलने और देखने वाला कोई नहीं है, जनजाति कर विभाग के अधिकारी ठेकेदार के नाम पर फर्जी बिलों का भुगतान करते चले आ रहे हैं, आदिवासी बालक छात्रावास कुर्सीढाना में देखने को मिला कि यंहा छात्रावास मरम्मत के नाम पर ठेकेदार को 10 से 15 लाख रुपए का भुगतान किया गया है जबकि अधीक्षक का कहना है कि मेरे छात्रावास में वर्ष 2024- 25 में ठेकेदार के द्वारा कोई काम नहीं हुआ है,
मेरे यंहा वर्ष 2022-23 में दो लाख रुपये का काम हुआ था उसके बाद कोई काम नहीं हुआ है और मेरे छात्रावास का नया भवन एक साल पहले से बना रहा है तो मरम्मत का सवाल ही नहीं है और नया छात्रावास बनकर तैयार हो गया है, मेरे छात्रावास के नाम से इतना भुगतान कैसे हुआ मुझे नहीं मालूम…सूत्रों की माने तो अफसरों ने मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपए की राशि का बंदरबाट किया है..?
अधीक्षक आदिवासी बालक छात्रावास कुर्सीढाना
तामिया खेल परिसर में भी लाखों की हेराफेरी…
सूत्रों के मुताबिक जनजाति कार्य विभाग द्वारा संचालित खेल परिसर तामिया में मरम्मत के नाम पर पैसों की लूट हुई है. हैरानी की बात ये है कि यंहा लाखों रुपये से खेल परिसर भवन की मरम्मत हुई और विभाग के द्वारा कोई निविदा नहीं निकल गई ये समझ के परे है आखिर लाखों रुपये से भवन की मरम्मत गुपचुप तरीके से ठेकेदार को मरम्मत का काम दिया गया और ठेकेदार ने भी थोड़ा बहुत मरम्मत का कार्य कर लिपाई पुताई करके लाखों रुपए हजम कर…और सूत्रों की माने तो यंहा के अधीक्षक ने ठेकेदार को लाखों का चेक बिना काम के दे दिया गया…
निविदा प्रक्रिया में भी बडा खेल…
“आपको बता दें कि निविदा प्रक्रिया को मैनेज कर अपने चाहते ठेकेदारों को काम दिलाने का जिले में ये पहला मामला नहीं है. इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं.लेकिन बड़ा सवाल यही है कि अब तक किसी भी मामले में कार्रवाई ना के बराबर हुई है. एक बार फिर बड़ी राशि के बंदरबाट के आरोप लग रहे हैं. जिसकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी.