पातालकोट के भारिया जनजातीय आज भी शिक्षा से दूर…
देश के स्वतंत्र हुए 79 साल हो गए लेकिन आज जनजाति समाज के लोगों को नहीं मालूम की 15 अगस्त क्यों मनाते हैं…
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ ) छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 65कि. मी दूरी पर स्थित तामिया पातालकोट गहरी खाई एवं घने जंगलों के बीच में बस हुआ है जंहा पर भारिया जनजाति के लोग निवास करते है लेकिन आजादी के 79 साल हो गये है लेकिन यंहा पर आज भी साक्षरता का स्तर बहुत कम है। इसका मुख्य कारण उनका दुर्गम इलाका, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, अंधविश्वास, जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है,
सरकार के द्वारा लाखों करोड़ खर्च होने के बाद भी आज भी

भारिया जनजातीय साक्षरता से कोसों दूर…
जी हाँ बात कर रहे है छिंदवाड़ा जिलें के तामिया पातालकोट की जो चारों ओर से गहरी गहरी खाई और घने जंगलों के बीच में बसा हुआ है जंहा भारिया जनजाति निवास करती है, यह जनजाति अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं और पारंपरिक ज्ञान के लिए जानी जाती है लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में बहुत पीछे है, जबकि सरकार हर वर्ष करोड़ों खर्च कर इनको मूल धारा से जोडने में लगी है यंहा निवास करने वाली भारिया जनजाति लगभग 400सौ बरसों से निवास कर रहे हैं और अपना जीवन यापन कर रहे हैं,शासन प्रशासन ने इनके उत्थान के लिए अनेकों प्रयास किया लेकिन कहीं ना कहीं भारिया जनजाति के लोगों में आज भी जागरूकता की कमी देखने को मिल रही है…

देश की आजादी के 79 वर्ष बाद भी भारिया जनजाति को लोगों को नहीं मालूम की 15 अगस्त क्यों मनाते हैं….

छिंदवाड़ा जिलें के तामिया पातालकोट में 400 वर्षों से निवास कर रहे भारिया जनजाति के लोगों को आज भी यह मालूम नहीं है कि 15अगस्त क्यों मानते हैं…?
जब जनजातीय लोगों से पूछा तो उनका कहना है कि इस दिन गांव में मिठाई और नारियल का प्रसाद मिलता है और कुछ लोग झंडा फहराते हैं…और भारत माता की जय बोलते है, जनजाति समाज को लोगों 15 अगस्त क्यों मानते हैं ये तक नहीं मालूम है इसलिए जरूरत है कि प्रशासन को भारिया जनजातीय समाज के बीच में हमारे देश के राष्ट्रीय पर्व के जानकारी देना चाहिए साथ ही इन्हें जागरूक करना चाहिए…