पशु चिकित्सा विभाग में मरम्मत के नाम पर लाखों का घोटाला..?
छिंदवाड़ा (चौथा- स्तंभ) मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा जिले में इन दोनों भ्रष्टाचार चरम पर है जिले के किसी न किसी विभाग में भ्रष्टाचार की खबर आम बात हो गई है.. ऐसा ही मामला देखने को मिला पशु चिकित्सा विभाग में
जंहा बिजली फिटिंग को लेकर लाखों रूपए के घोटाले का आरोप लग रहा है। आरोप है कि कार्यालय में बिजली की फिटिंग को लेकर 75 लाख का टेंडर जारी किया गया था जिसमें जिले में स्थित पशु कार्यालय में ट्यूबलाइट, बल्ब पंखे और अन्य बिजली के सामान लगने थे लेकिन फर्म और विभाग के उपसंचालक की सेटिंग की चलते बिजली के सामान कम लगाए गए और अधिक के बिल वाउचर बना कर ज्यादा पैसे निकाल लिए।

जिलें के सामाजिक कार्यकर्ता श्री चंद चौरियि ने लगाए आरोप..
छिंदवाड़ा जिलें के पशु चिकित्सा विभाग में हुए इस धोटाल की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता श्रीचंद चौरिया ने करते हुए लाखों रूपए के इस घोटाले की जांच कर उपसंचालक पर कार्रवाई की मांग की है..
शिकायतकर्ता ने बताया…
शिकायतकर्ता श्री चंद चौरिया ने बताया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपसंचालक एचजीएस पक्षवार ने शासन को गुमराह कर ग्रामीण क्षेत्र के कार्यालयों के मेंटनेंस के नाम पर 75 लाख रूपए का बजट शासन से स्वीकृत कराया था, लेकिन इस मामले में हेरफेर करते हुए कुछ ही कार्यालयों में मेंटनेंस की राशि का उपयोग किया गया, बाकी राशि को लेकर पशुपालन विभाग भी जवाब नहीं दे पा रहा है। संभावना है कि इस राशि का आपस में ही बंदरवाट कर ली गई है।
शासन से भवन मरम्मत के लिए मांगा था बजट..
पशु चिकित्सा विभाग छिंदवाड़ा के उपांचालक डॉ. पक्षवार ने कुछ माह पूर्व ही शासन को पत्र लिखकर जिले में संचालित 100 से ज्यादा पशु चिकित्सालय, पशु औषधि केन्द्र और जिला मुख्यालय के कार्यालय के साथ पशु ग्राम ईकाई में विद्युत सामग्री सहित उपकरण लगाने के लिए लाखों रूपए का बजट मांगा था। शासन ने मेंटनेंस के लिए विभाग को 75 लाख रूपए का बजट स्वीकृत किया था। जैसे ही सरकार ने बजट स्वीकृत किया, वैसे ही आनन-फानन में उपसंचालक ने ग्वालियर के एक ठेकेदार को भवन मरम्मत और बिजली फिटिंग का ठेका दे दिया। कंपनी के ठेकेदार ने अधिकारियों की मिली भगत से मेंटनेंस के नाम पर नाम मात्र का काम किया और भुगतान लेकर चला गया…?
कम लगे उपकरण और निकाल ली पूरी रकम…
शिकायतकर्ता के मुताबिक 6 वल्व, 2 ट्यूब लाइट, 2 फेन लगाने में 1 लाख 350 रुपए निकाल लिए गए, इस तरह विभाग के जिले के अंचलों में स्थित कई कार्यालय में बिजली का सामान कम लगाने और बिल ज्यादा निकाल कर भ्रष्टाचार करने की शिकायत की गई है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ठेकेदार को बिना काम कराए भुगतान..
इस पूरे मामले की शिकायत के बाद मत्स्यपालन पशुपालन और डेयरी मंत्रालय पशुपालन और डेयरी विभाग के डायरेक्टर ने मप्र शासन के प्रमुख सचिव को दिए जांच के आदेश दियें है,अब देखना यह होगा कि जांच के बाद इस मामले में क्या कार्रवाई होगी। कृषि भवन दिल्ली के प्रमुख सचिव ने शासन को जांच के लिए भेजा है।
बदल गए कई कलेक्टर, लेकिन जमे रहे डॉ. पक्षवार…
इस पूरे मामले में मजे की बात तो यह रही कि तीन दशकों के दौरान जिले में कई कलेक्टर आए और अपना कार्यकाल पूरा कर चले भी गए, लेकिन डॉ. पक्षवार अंगद के पैर की तरह पशु चिकित्सा विभाग में राजनैतिक संरक्षण के चलते जमे हुए हैं। इस दौरान उनकी कई शिकायतें भी हुई, लेकिन अपने रसूख और राजनैतिक पकड़ के चलते वे अब तक कार्रवाई से बचे हुए हैं। और पशु चिकित्सा विभाग को दीमक की तरह चाट रहे हैं।
नियमों की उड़ रहीं धज्जियां…
शासकीय सेवा में
पारदर्शिता एवं ईमानदारी कायम रहे इसलिए विभाग में अफसरों के ट्रांसफर तीन साल में किया जाना जरूरी है, लेकिन इन महाशय का एक ही स्थान पर जमे रहने से सारे नियमों एवं कायदों की धज्जियां उड़ रही हैं। राज्य शासन का इस पर ध्यान नहीं है जिसका फायदा उठाकर उपसंचालक मनमानी पर उतारू हैं।
अंगद के पैर की तरह जमें है उपसंचालक..?
बताया जा रहा है कि वर्तमान में पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. एचजीएस पक्षवार करीब 30 वर्ष पहले छिंदवाड़ा में आए थे। उनकी पोस्टिंग ईमलीखेड़ा के कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र में डॉक्टर के पद पर की गई थी। इस बीच उनका प्रमोशन उपसंचालक के पद पर हुआ और इसी बीच वे बैतूल पशु चिकित्सा विभाग चले गए थे। यहां दो साल रहने के बाद उन्होंने जुगाड़ लगाकर फिर अपनी पोस्टिंग उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवा के पद पर छिंदवाड़ा में करा ली, तब से लेकर अब तक वे यही पदस्थ हैं।