बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे आदिवासी के बच्चे….
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ)- मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आदिवासी छात्र-छात्रओ को बेहतर शिक्षा दिलवाने के लिए अनेको योजनाऐं बना कर अदिवासी क्षेत्रो में जगह-जगह पर छात्रावास स्थापित करवा कर छात्रावासो में रहने खाने व पढाई करने की अच्छी से अच्छी से सुविधाऐं मुहैया करवाई जा रही है सरकार इस मामले में काफी गंभीर है।
करोड़ों का बजट फिर भी छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं से वंचित छात्र…
जी हाँ हम बात कर रहे है छिंदवाड़ा जिलें की जंहा आदिवासी बच्चों को छात्रावासों में सभी बुनियादी सुविधा मिल सके इसके लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपए का बजट दे रही है लेकिन लापरवाह अधीक्षक सरकार की मनसा में पानी फिरते नजर आ रहे हैं । लेकिन कुछ भष्ट नौकरशाहो द्वारा अमानात में खयानत कर इन अदिवासी बच्चो के साथ अन्याय करते नजर आ रहे है और सरकार की मंशा को भी पुरा नही होने दिया जा रहा है।
जनजाति कार्य विभाग छिदंवाडा द्वारा छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे छात्र…
छिंदवाड़ा जिलें आदिवासी समाज के बच्चों के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आदिवासी बच्चों के लिए छात्रावास संचालित किए जा रहे है। ताकि अदिवासी बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर उच्च स्थानों पर पहुंचकर देश के विकास में अपनी भुमिका निभा सके। किन्तु विडम्बना यह है कि अदिवासी छात्रावासो का संचालन करने कि जिम्मेदारी लिए हुए अधिक्षक आदिवासी बच्चो के लिए आए मद में हेराफैरी कर अदिवासी छात्र-छात्राओ को सुविधाओ से वंचित कर अमानवीय कृत्य कर रहे है। गौरतलब तथ्य यह है की जहां एक और अधिक्षक सरकार को चुना लगा रहे रहे है वही दुसरी और इनकी शिकायतो के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी इनके खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए इन भष्ट अधिक्षको को बचाने के प्रयास कर रहे है?

प्रतापगढ़ बदला जूनियर छात्रावास में जेल की तरह रख रहे आदिवासी बच्चों…
जिले के तामिया विकासखंड में संचालित आदिवासी बालक जूनियर छात्रावास प्रतापगढ़ बदला में ऐसा ही एक नजारा देखने को मिला जहां पर छात्रावास में बाहर से ताला लगाकर छात्रों को जेल की तरह रखा जा रहा है बाहर से छात्रावास के गेट में ताला लगा दिया जाता है….

छात्रावास में बच्चों को कैदी की तरह रखते हैं अधीक्षक….
सूत्रो की जानकारी के अनुसार छात्रावास में बाहर से हर समय ताला लगा दिया जाता है जिसके कारण इस छात्रावास में ऐसा लगता है कि छात्र कोई जेल में रह रहे है जब हमारी टीम छात्रावास गई तो ऐसा नजारा देखकर हम भी आश्चर्यचकित हो गए क्योंकि छात्रावास के बाहर से ताला लगा हुआ था और गेट के अंदर से एक चौकीदार बोल रहा है कि तुम कौन हो अभी अधीक्षक नही है आप बाद में आना यह देखकर यही समझा जा सकता है कि छात्रावास अधीक्षक इन आदिवासी समाज के बच्चों को जेलर की तरह उनसे व्यवहार कर रहे हैं ना उन्हें खेलने कूदने दिया जाता ना उन्हें कोई अन्य बुनियादी शिक्षा दी जा रही है..
मीनू के हिसाब से भी नहीं दिया जाता भोजन…
आदिवासी जूनियर बालक छात्रावास प्रतापगढ़ बदला में अधीक्षक महोदय तामिया से आना-जाना करते हैं जिसके कारण बच्चों को मीनू के हिसाब से भी भोजन नहीं दिया जाता यहां पर दैनिक वेतन भोगी में जो कर्मचारी लगे हुए हैं वह जो बना देते हैं गरीब आदिवासी के बच्चे वही भोजन करने को मजबूर है ना ही उन्हें सुबह नस्ता दिया जाता है..लेकिन निगरानी करने वाले विभाग के अधिकारी आखिर कैसे कर रहे हैं इन छात्रावासों की निगरानी..?
क्या कहते है निगरानी करने वाले क्षेत्र संयोजक…
जब इस विषय में जनजाति कार्य विभाग के क्षेत्र संयोजक जिनके कंधे में इन छात्रावासों की निगरानी करने की जिम्मेदारी है,उन से जब इस बिषय में बात किये तो उनका कहना है कि छात्र परेशान करते रहे है इसलिए अधीक्षक ने ताला लगवाया होगा और जब छात्रावास में अधीक्षक नहीं रहता इसकी जानकारी मांगी गई तो उनका कहना है कि हम रात के 10 बजे सभी छात्रावास से जिओ टेक से फोटो मंगवाते हैं ऐसा क्षेत्र सयोजक का कहना है…?
ऑफिस में बैठकर हो रही है इन छात्रावासों की निगरानी…
सूत्रों की जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा जिलें में जनजाति कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एवं आश्रम शालाओं की निगरानी इन दिनों भगवान भरोसे चल रही है क्योंकि निगरानी करने वाले इन दिनों जिला कार्यालय में बैठकर ही इन छात्रावासों/ आश्रम शाला की निगरानी करते नजर आ रहे हैं..?
सहायक आयुक्त का क्या कहना…
जब इस विषय में सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग से बात की तो उनका कहना है कि आपके द्वारा जो शिकायत बताई गई है इसकी मैं जांच करता हूं और यदि छात्रावास में ऐसी कोई लापरवाही या शिकायत मिलती है तो ऐसे अधीक्षक पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी…
सत्येंद्र सिंह मरकाम सहायक आयुक्त जनजाति कर विभाग छिंदवाड़ा