वनाधिकार पट्टा बना आत्मनिर्भरता की नींव, किसानों की बदली किस्मत…
छिन्दवाड़ा/छिंदवाड़ा जिले की जनपद पंचायत जामई की दूरस्थ ग्राम पंचायत कूकरपानी में वनाधिकार अधिनियम के तहत मिले भूमि पट्टे ने ग्रामीण किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

गांव के दो मेहनतकश किसान श्री सुखराम भोपा और श्री सियालाल भोपा, की यह साझा कहानी बताती है कि जब किसी किसान को उसकी जमीन का अधिकार मिलता है, तो वह कैसे अपनी मेहनत और योजनाओं के सहयोग से आगे बढ़ सकता है।
श्री सुखराम भोपा को जब वनाधिकार पट्टा प्राप्त हुआ, तो उनके जीवन में आत्मनिर्भरता का रास्ता खुला। मनरेगा के तहत खेत पर सिंचाई के लिए कुएं का निर्माण हुआ, जिससे वे अब पारंपरिक फसलों के साथ सब्जी-भाजी और चने की भी खेती करने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर वनाधिकार पट्टा धारक श्री सियालाल भोपा के खेत पर खेत तालाब बनाया गया, जिससे सिंचाई की समस्या दूर हुई और खेती में स्थायित्व आया।

वे बताते हैं कि तालाब बनने के बाद फसलों की चिंता खत्म हो गई है। अब गेहूं और चने की फसल पहले से बेहतर हो रही है। शासन से जो मदद मिली, उसने हमारे जैसे छोटे किसानों की दिशा बदल दी है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, का धन्यवाद करते हैं।
इन किसानों की सफलता के पीछे प्रशासन की गंभीरता और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।