पंचायत भवन बना स्कूल, सिस्टम बना तमाशा.. 5 साल से बच्चों की शिक्षा से खिलवाड़, जिम्मेदार अफसर मौन..?

Chautha Sthambh

पंचायत भवन बना स्कूल, सिस्टम बना तमाशा…!

एक ही छत के नीचे पढ़ाई और राजनीति..?

5 साल से बच्चों की शिक्षा से खिलवाड़, जिम्मेदार अफसर मौन..?
Byadmin 29 January 2026

छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) जिलें के अमरवाड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोपाखेड़ा में शिक्षा व्यवस्था का ऐसा शर्मनाक चेहरा सामने आया है, जो सरकारी दावों की पोल खोल देता ह

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  • पंचायत भवन में लग रहा 5 साल से स्कूल…!

    अमरवाड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोपाखेड़ा के पंचायत भवन के भीतर ही प्राथमिक शाला संचालित की जा रही है, जबकि उसी भवन में पंचायत कार्यालय, बैठकों और ग्राम सभा जैसी गतिविधियां भी निर्बाध रूप से चल रही हैं।

    एक ही छत के नीचे पढ़ाई और राजनीति…
    छिंदवाड़ा जिलें के अमरवाड़ा विकासखंड के कोपाखेडा ग्राम पंचायत भवन में पिछले पाँच सालों से प्राथमिक शाला संचालित हो रही है लेकिन जिलें एंव विकासखंड में बैठे शिक्षा विभाग के अधिकारियों की आँखों में कुछ नहीं दिख रहा है। यंहा प्रतिदिन कार्यालयी गतिविधियों का टकराव के चलते बच्चों के भविष्य से खुला खिलवाड़ हो रहा है। शिक्षक बच्चों को पंचायत भवन में पढ़ाने को मजबूर हैं और उसी समय सरपंच, सचिव व ग्रामीण पंचायत कार्य निपटाते नजर आते हैं। शोर, आवागमन और बैठकों के बीच बच्चों की पढ़ाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।

    5 साल से जारी अव्यवस्था, फिर भी फाइलों में सब ठीक..!

    ग्रामीणों के अनुसार यह स्थिति पिछले लगभग पांच वर्षों से लगातार ऐसी स्थिति बनी हुई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शिक्षा विभाग और जनपद पंचायत के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल यह है कि
    क्या प्राथमिक शाला भवन के लिए आवंटित बजट कागजों में ही खर्च हो गया?
    क्या निरीक्षण रिपोर्ट में झूठी जानकारी भरकर मामले को दबाया जा रहा है?
    या फिर बच्चों की शिक्षा से ज्यादा फाइलें और कमीशन जरूरी हैं?
    जिम्मेदार कौन? शिक्षा विभाग या जनपद पंचायत

    नियत क्या कहता है…

    नियमों के मुताबिक प्राथमिक शाला के लिए अलग सुरक्षित और शांत भवन अनिवार्य है, इसके बावजूद वर्षों तक पंचायत भवन में स्कूल चलना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

    शिक्षा विभाग के अधिकारी की अनदेखी…

    ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह अव्यवस्था इतने लंबे समय तक नहीं चल सकती। शिक्षा के नाम पर सरकार से मिलने वाली योजनाएं और राशि आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिख रही?

    अब सवाल साफ है..

    क्या जिला प्रशासन एंव शिक्षा विभाग बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर होगा.?

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