धर्म की नगरी में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगत गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद का अपमान नहीं सहेगा समाज…
समस्त संत समाज व सनातन धर्म प्रेमी नागरिक बंधुओं ने जताया आक्रोश…
राष्ट्रपति के नाम सौंपा चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन.
By admin – 19 December 2026
छिन्दवाड़ा (चौथा स्तंभ) धार्मिक आस्था, सभ्यता व संस्कृति की भूमि उत्तर प्रदेश में परम पूज्य जगत गुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के नन्हें बटुकों व बुजुर्ग साधु संतों के साथ उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के इशारों पर पुलिस ने बर्बरता की है। यह परम पूज्य स्वामी व अन्य साधु संतों का नहीं बल्कि समस्त सनातन समाज का अपमान है। जिसके विरोध में समस्त संत समाज व सनातन धर्म प्रेमी नागरिक बंधुओं ने चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रस्तुत किए।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश में परम पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी अपने नन्हें बटुकों व बुजुर्ग साधु संतों के साथ मौनी अमावस्या के पुण्य अवसर पर घाट पर स्नान करने पहुंच रहे थे। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के इशारो पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने बर्बरतापूर्वक बल प्रयोग व मारपीट करते हुए स्वामी जी, बटुकों व अन्य साधु संतों को स्नान करने से रोका गया। यह न केवल धार्मिक भावनाओं पर चोट है साथ ही समस्त सनातन समाज का भी घोर अपमान है।
संतों, धर्मात्माओं व बटुकों पर बल प्रयोग कर उन्हें धार्मिक अनुष्ठान से वंचित करना लोकतंत्र, संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की मूल भावना पर सीधी चोट है। धर्म की मूल भावना सभ्य व संस्कारवान लोकतंत्र की स्थापना करना होता है, किन्तु जब सरकारें धर्म पर प्रहार करेगी तो वह सरकार धर्म व सनातन विरोधी कहलाती है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने प्रस्तुत किया है। उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा स्वामी जी व संत समाज के साथ किया गया यह व्यवहार केवल स्वामी जी नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति व आस्था पर सीधी चोट है। यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो यह भविष्य में सामाजिक एकता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

चार सूत्रीय मांगों का सौंपा ज्ञापन:-
.सम्पूर्ण घटना की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
.दोषी पुलिस अधिकारियों व जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
. भविष्य में संतों, धर्माचार्यों एवं श्रद्धालुओं के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना यह सुनिश्चित किया जाए।
सनातन परंपराओं के पालन में प्रशासनिक मनमानी पर रोक लगाई जाए।

