आदिवासी बच्चों के साथ छलावा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावे, जमीनी हकीकत उन की पोल खोलते हुई तस्वीर….

Chautha Sthambh

आदिवासी बच्चों के साथ छलावा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावे, जमीनी हकीकत उन की पोल खोलते हुई तस्वीर….

छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ )मध्य प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर सरकार “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा” के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र तामिया( धर्वाढाना संकुल की ज़मीनी हकीकत उन दावों की पोल खोल रही है।जंहा बच्चों अच्छे से बैठकर भी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं भवन भी जर्जर व अधूरे किचन शेड (10×10 फीट) में पढ़ने को मजबूर हैं। कक्षा पहली से पाँचवीं तक के बच्चे एक ही कमरें और तंग और असुरक्षित जगह में बैठकर “भविष्य गढ़ने” की कोशिश कर रहे हैं।..

स्कूल में गंदगी का अंबार… जिम्मेदार आखिर कब तक रहेगें मौन…
जी हाँ हम बात कर रहे है आदिवासी अंचल तामिया के संकुल केंद्र धुर्वाढाना की जंहा आदिवासी बच्चों के भबिष्य से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, स्कूल परिसर एंव कमरों में गंदगी का अंबार लगा हुआ यही पर बैठकर बच्चों को पढाया जा रहा है

मिड. डे मील और स्कूल परिसर में स्वच्छता की जमीनी हकीकत की पोल खोलती तस्वीर….

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  • आदिवासी बच्चों के लिए जो मिड- डे मील योजना के तहत भोजन बनता है वहां पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और गंदगी के बीच बच्चों के लिए भोजन तैयार होता है, सूत्रों की जानकारी के अनुसार यंहा सप्ताह में एक-दो दिन ही भोजन दिया जाता है बाकी कभी पोहा खिला देते हैं और दिनों में बच्चों को भोजन दिया ही नही जाता है, ऐसी गंदगी वाली जगह पर जो भोजन तैयार होता है इससे कई बार बच्चे बीमार भी हो जाते है

    एक कमरों में तीन तीन क्लास एक साथ हो रही संचालित…!
    तोमिया ब्लॉक के आदिवासी अंचल में अक्सर यह खबरें सुर्खियों में बनी रहती है कि आदिवासी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षक एक ही कमरे में तीन-तीन चार-चार क्लासों को एक साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं तो आप समझ सकते हो कि बच्चों को शिक्षा कैसी मिलती होगी.. जो शिक्षा नियमों का सीधा उल्लंघन है।

    बच्चों को पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं….

    सरकार लाखों दबे करें कि आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एंव बुनियादी शिक्षा के लाखों दावे करें लेकिन जमीनी हकीकत और कुछ कहती है, यह तस्वीर देखकर साफ समझ में आता है कि आज बच्चों को स्वच्छ पानी के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है एक गंदी छोटी सी टंकी रख दिया जाता है उसमें भी पानी नहीं रहता है मजबूर में बच्चे गंदा पानी पीते हैं..

    गरीब आदिवासी के बच्चे सरकार से पुकार करते हुए

    यह सिर्फ एक स्कूल नहीं,बल्कि सरकारी व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल बन चुका है…!

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