छिन्दवाड़ा। जंगल में तेंदुए की मौत ने वन विभाग के अधिकारियों के चेहरों की हवाइयां उड़ा दी है दरअसल तेंदुआ की मौत जिस बीमारी से होने की आशंका जताई जा रही है वह सही साबित हुई तो वन विभाग के दूसरे जानवरों पर भी जिंदगी का संकट गहरा जाएगा।

टीबी से तेंदुआ की मौत,जंगल में मचा हड़कंप।
छिंदवाड़ा के चिंदी वन विभाग रेंज में एक तेंदुआ की मौत हो गई दो डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया मोस्ट पोस्टमार्टम के बाद शुरुआती तौर पर मौत के जो कारण सामने आए हैं वह वन विभाग के अधिकारियों समेत सभी के लिए चिंताजनक है वन विभाग के एसडीओ अनाड़ी बिठौलिया ने बताया कि डॉक्टर ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आशंका जताई है कि मौत या तो हार्ट अटैक से हुई है या फिर टीवी यानी ट्यूबरक्लोसिस बीमारी से हुई है हालांकि फाइनल रिपोर्ट सागर से आना बाकी है जिससे पुष्टि हो पाएगी।

खतरनाक है जंगल में टीबी का होना दूसरे जानवरों पर भी संकट।
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट पशु चिकित्सक डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया जानवरों में भी टीबी की बीमारी होती है या तो जंगली जानवरों से फैल सकती है या फिर इंसानों से भी फैलती है इसमें तेंदुआ बाघ कैटल हो सकते हैं क्योंकि ये एक जूनोटिक बीमारी है जो दूसरे जंगली जानवरों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है इसमें देखरेख बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि जो तेंदुए की मौत हुई है उसमें कुछ अंगों में ट्यूबरक्लोसिस के संक्रमण पाए गए हैं हालांकि अभी पूरी तरीके से यह पुष्टि नहीं की जा सकती है क्योंकि जिन डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम किया है उन्होंने बिसरा को सागर लैब में जांच के लिए भेजा है।

हवा में तैरते हैं टीबी के जीवाणु।
डॉ अंकित मेश्राम ने बताया कि ट्यूबरक्लोसिस संक्रमण वाली बीमारी है हवा से सांस लेने से सलाइवा से या फिर खून के संक्रमण से फैलता है कई बार तो जंगली जानवरों से यह बीमारी इंसानों में भी आ सकती है क्योंकि इंसान उनके संपर्क में आता है ऐसे में जंगल के जानवरों के लिए तो यह खतरनाक है ही इंसानों के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

जंगल में देखरेख के साथ जागरूकता की जरूरत।
डॉ अंकित मेश्राम का कहना है कि जंगल में वन विभाग को देखने की जरूरत है अगर ऐसे लक्षण पाए जाते हैं तो वर्कशॉप आयोजित करने के साथ ही लोगों के लिए जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए और ऐसे जानवरों की मॉनिटरिंग करनी भी चाहिए जिनमें लक्षण देखे जाते हैं।

