जैविक हाट बाजार बना शहरवासियों के शुद्ध, विषमुक्त सब्जी, फल, अनाज- दालें क्रय करने का केंद्र-
रिपोर्ट -ठा. रामकुमार राजपूत
मोबाइल -8989115284
स्थान -छिंदवाड़ा म. प्र
चौथा स्तंभ(छिन्दवाड़ा) प्रदेश सरकार के निर्देश पर अब हर जिले में जैविक हाट बाजार लगाई जा रही है। छिंदवाड़ा जिलें के गुरैया सब्जी मंडी भी अब प्रत्येक शनिवार को लगने वाले जैविक हाट बाजार में जिले के किसानों द्वारा रसायन मुक्त प्राकृतिक उत्पाद जैसे – सब्जी, अनाज, दाल, मल्टीग्रेन नवरत्न आटा, ज्वार – मक्के का आटा, फल, घी, गुड़, मशरूम, हल्दी, अमरुद, पपीता, संतरा, मोसम्बी, स्ट्राबेरी आदि शहरवासियों के लिए उपलब्ध कराये जा रहे हैं, जिसे बड़ी संख्या में शहरवासियों द्वारा पसंद किया जा रहा है। आज के बाजार में उप संचालक कृषि श्री जितेंद्र कुमार सिंह अपने परिवार सहित, कृषि विभाग, राजस्व विभाग, नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों व डॉक्टर्स की हेल्थ टीम के साथ शुद्ध सब्जी खरीदने जैविक हाट बाजार पहुंचे एवं सब्जियाँ खरीदी ।

30 किसानों द्वारा अपने प्राकृतिक उत्पाद विक्रय के लिये लाये…
जैविक हाट बाजार में आज लगभग 30 किसानों द्वारा अपने प्राकृतिक उत्पाद विक्रय के लिये लाये गये थे, जो हाथों-हाथ शहरवासियों द्वारा ख़रीद लिये गये। प्रशासन द्वारा प्रारंभ कराये गए इस साप्ताहिक जैविक प्राकृतिक हाट बाज़ार में प्रति सप्ताह उपभोक्ताओं का उत्साह बढ़ता जा रहा है, कुछ उपभोक्ता सुबह 10 बजे ही हाट बाज़ार में पहुंचकर अपने पसंद के फल, सब्जियाँ ख़रीद लेते हैं । कुछ किसानों की सामग्री दोपहर 12 बजे तक पूरी बिक्री हो गई थी ।

जिलें के किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता…. कागजों में नहीं होना चाहिए प्रशिक्षण…?
प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को दिया जाना चाहिए प्रशिक्षण….
प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिलें के किसानों को जागरूक एवं उन्हें प्रशिक्षण देना चाहिए ताकि किसान प्राकृतिक खेती कर सकें और उन्हें प्रकृति खेती से क्या क्या लाभ है इस की जानकारी भी बताना चाहिए ताकि किसान जागरूक हो सके। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार सरकार लगातार प्रयास कर रही है. जिसके चलते छिंदवाड़ा में भी पुरुष और महिला किसानों को खेतों में छिड़काव करने के लिए प्राकृतिक कीटनाशक बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे कई किसान अपने खेतों में प्राकृतिक और जैविक फसल उगा रहे हैं, लेकिन उन्हें बाजार उपलब्ध नहीं हो पाता था. जिसकी वजह से किसानों को बेचने में दिक्कत आती थी. इसलिए अब हर शानिवार को हाट बाजार लगाया जा रहा है , ताकि किसानों की प्राकृतिक और जैविक सब्जियां और फसल बिक सके.

