क ख ग घ भी नहीं पढ़ पाते जिले दो लाख नो हजार युवा व बुजुर्ग…
जिलें में सालों से चल रही प्रौढ़ शिक्षा अभियान की खुली पोल,
अब फिर शुरू हुआ जिले में नव अक्षर साथी अभियान…
जिलें में हर ब्लॉक में एक जन शिक्षक फिर भी नही साक्षर हो पाये युवा एंव बुजुर्ग…
चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) जिले के साथ में प्रदेश को साक्षर बनाने के उद्देश्य और प्रौढ़ शिक्षा अभियान की शुरुआत की गई थी जिसमें करोड़ों रुपए खर्च हुए, लेकिन खर्च का ग्रामीण क्षेत्र पर कितना असर पड़ा यह हाल में एक सर्वे को देखकर पता लग जाता है। जहां जिले में 15 साल से ऊपर के लोगों का जब सर्वे किया गया तो उनमें अभी भी पाँच लाख लोग ऐसे हैं, जो क ख ग घ भी पढकऱ नहीं जानते। ऐसे में इस अभियान पर हुए खर्च या मॉनिटरिंग सब पर सवाल खड़े होते हैं। वही एक बार फिर प्रौढ़ शिक्षा का नाम बदलकर वापस से करोड़ों रुपए खर्च कियें जा रहे है। अब इस अभियान को उल्लास नव भारत साक्षर अभियान नाम लिया जाना है, जो 2022 से लेकर 2027 तक चलेगा।

प्रदेश के मुख्यमंत्री डाँ मोहन यादव ने इस कार्य योजना को इसी साल स्वीकृति दी है, ऐसे में पंचायत में अक्षर साथी की नियुक्ति की गई है। प्रौढ़ शिक्षा की तरह ही गांव गांव में लोगों को शिक्षित करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है । लेकिन पुराने अनुभवों को यदि देखें तो ग्रामीण अंचल में उसका कुछ खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। क्योंकि आज भी न सिर्फ गिनती बल्कि पहाड़ा और 12 खड़ी आदी ग्रामीणों के साथ ही कई शहरी क्षेत्र में लोगों को नहीं आती है।
तो फिर क्या पढ़ाया
उल्लास नव भारत साक्षर अभियान को शुरू करने से पहले शिक्षा विभाग के ही शिक्षकों के माध्यम से एक सर्वे कराया गया, जिसमें पाया गया की जिलें में अभी भी दो लाख नौ हजार लोगों को अभी भी पढऩा लिखना नहीं आता। यहां बताना होगा कि गांव गांव में स्कूल खोल दिए गए और 40 साल से ज्यादा की आयु वालों को और शिक्षा के माध्यम से भी शिक्षा दी जा रही थी, तब भी जिले के हालात ठीक नहीं है। सिर्फ हर ब्लाक में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है आफिस में बैठकर नौकरी कर रहे है। और मॉनिटरिंग के नाम पर लाखों की हेराफेरी कर रहे है..
नीति आयोग की रिपोर्ट में भी पिछड़े
जिले की शिक्षा व्यवस्थाओं की बात करें तो नीति आयोग की रिपोर्ट में भी पिछले कई सालों से यह शिक्षा बदहाल है। लगातार इसको सुधारने के लिए विभिन्न तरह के अभियान और बजट आदि जारी होते रहे, लेकिन रिपोर्ट की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसे में जरूरी है बेहतर मार्गदर्शन और शिक्षा को सुधारने के लिए सतर्क मॉनिटरिंग की वर्तमान में प्रौढ़ शिक्षा दूर की बात स्कूली व्यवस्थाओं पर ही जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
कहां गया प्रौढ शिक्षा का सामान…
जिले की प्रत्येक पंचायत में एक अक्षर साथी की नियुक्ति की गई थी, उसे कोई मानदेय नही दिया जाता है इसके अलावा सामग्री भी उपलब्ध नही कराई गई जा रही है । जबकि पहले न्यूनतम मानदेय एवं विभिन्न प्रकार की सामग्री दी जाती थी,जिनमें कुर्सी टेबल और विभिन्न तरह के मनोरंजन के साधन ताकि बुजुर्ग लोग उनकी क्लास में पढऩे आते रहें। लेकिन प्रौढ़ शिक्षा के खत्म होने के साथ ही इस सामग्री का भी कुछ पता नहीं है।
जिला प्रौढ शिक्षा अधिकारी का कहना….
वर्ष 2011 के सर्वे के अनुसार जिले में पहले 5 लाख 65 हजार लोग बुनियादी शिक्षा से वंचित थे लेकिन अभी 2लाख 17 हजार लोग आज भी बुनियादी शिक्षा से वंचित है इससे यही लगता है कि जिले में सिर्फ कागजों में योजना चल रही है।

