साहब जी हमें किस का सहारा.., अधीक्षक नही देता है पेटभर भोजन…. छात्रों की पुकार…
सीनियर आदिवासी छात्रावास धनेगांव (बिछुआ) में अधीक्षक कर रहा छात्रों को प्रताड़ित…. गांव वालों का आरोप
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिलें में जनजाति विभाग द्वारा संचालित छात्रावास भगवान भरोसे संचालित हो रहे है, इन छात्रावासों में आयें दिनों गरीब बेसहारा आदिवासी के बच्चों प्रताड़ित हो रहे है लेकिन जिलें में बैठे सहायक आयुक्त के कानों में इन बेसरा आदिवासी बच्चों की पुकार नहीं पहुंचती है, उन्हें तो सिर्फ पैसे एवं रसूखदारों की आवाज ही इन तक पहुंचती है…
आदिवासी बच्चों का शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकार ने खोले है छात्रावास….
शिक्षा का स्तर सुधारने और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी/ हरिजनों के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, ताकि यहां रहकर छात्र-छात्राएं आसानी से पास के स्कूल पहुंचकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। जिले में बड़ी संख्या में आदिवासी छात्रावासों का संचालन हो रहा है लेकिन इनमें कई छात्रावास ऐसे भी हैं जहां रहने वाले छात्र-छात्राओं को पेटभर भोजन तक नहीं मिल पा रहा है जबकि सरकार द्वारा छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं को भरपूर भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है यही नहीं नहाने का साबुन से लेकर तेल आदि के लिए छात्रवृत्ति के अतिरिक्त राशि छात्रों के खाते में डाली जाती है लेकिन कुछ छात्रावासों में अधीक्षकों की लापरवाही का खामियाजा वहां रहने वाले छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
रात में गायब रहते हैं धनेगांव का
अधीक्षक….
जिलें के बिछुआ विकासखंड में जनजाति विभाग द्वारा संचालित सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास धनेगाँव में बिछुआ ब्लॉक का सबसे दबंग अधीक्षक रमेश पराडकर जो लगभग 15 से 20 सालों से बिछुआ ब्लाक के छात्रावासों में अधीक्षक के पद पर इन्हे हटाने वाला कोई नही है, इसलिए इन महाशय की इस क्षेत्र के छात्रावासों में इनका ही नाम चलता है, ये महाशय अभी बिछुआ ब्लॉक में छात्रावास संघ के अध्यक्ष भी है, और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं से भी इनके मधुर संबंध हैं इन्हें हटाने के लिए कई बार ग्रामीणों ने शिकायत किया लेकिन आज तक इन्हें नहीं हटा पाए सहायक आयुक्त…
धनेगाँव अधीक्षक के बेटे की दुकान से होता है बिछुआ ब्लॉक के छात्रावास में किराना सप्लाई…?
जी हाँ ये महाशय की ही दुकान( बेटे करता है दुकान का संचालन)
से ही पूरे बिछुआ ब्लॉक में जनजाति विभाग द्वारा संचालित सभी छात्रावास में किराना का सामान सप्लाई….और कभी भी छात्रावास में नही रहते है ये महोदय कभी कभी ही छात्रावास में आते क्योंकि इनका गांव भी धनेगाँव छात्रावास में नहीं रहते
जनजाति विभाग की बीईओ को भी लोकायुक्त पुलिस के द्वारा पकड़ चुके…
बिछुआ ब्लाक के ये दबंग अधीक्षक है। क्योकि जनजाति विभाग के बिछुआ की बीईओ को भी रिश्वत मांगने के मामले में लोकायुक्त से पकड़ चुके हैं, क्योंकि इनका आरोप था कि मेरी किराना दुकान से सामग्री सप्लाई होती है इसी के एवरेज में जांच के नाम पर वीईओ उनसे रिश्वत मांग रही थी ऐसे ये अधीक्षक ने आरोप लगया था..?
छात्रावास में रहने वाले छात्रों को नहीं मिलता भरपेट भोजन ..
यंहा रहने वाले छात्रावास के समय पर ना ही भोजन मिलता है ना ही समय पर उन्हें नास्ता रोटी भी सिर्फ दिखावा के लिए दी जाती है एक दो रोटी और दाल, सब्जी में पानी, ही पानी रहता है….
छात्रावास में छात्रों के साथ होती है मारपीट…
छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने ग्रामीणों के समाने बताया कि छात्रावास में रहने वाला छात्रों के साथ अधीक्षक एंव चपरासी मारपीट करते है जिसकी शिकायत छात्रों ने ग्रामीण जनप्रतिनिधि के समाने किया है अब देखना है जिलें में बैठे मंत्री जी के खास सहायक आयुक्त इन पर क्या कार्रवाई करते हैं…
अधीक्षक करता है बच्चों को हाथों पर शरीर की मालिश…
सूत्रों की जानकारी के अनुसार धनेगाँव छात्रावास अधीक्षक यंहा रहने वालें अधीक्षक के हाथों अपने शरीर की मालिश करता है और नही करने वाले लडको के साथ मारपीट करता है ऐसा हम नही कह रहे है यंहा गयें ग्रामीणों के समाने छात्रों ने बताया है
दाल सब्जी में पानी ही पानी, भोजन भी गुणवत्ताहीन…
यंहा रहने वाले छात्रों को छात्रावास में ना अच्छा भोजन मिल रहा है ना ही सुबह नास्ता, कभी कभी पोहा का नास्ता सिर्फ दिखावा के लिए बनाया जाता है वह भी एक-एक चम्मच पोहा का नाश्ता दिया जाता है दाल और सब्जी में सिर्फ अपनी ही पानी होता है रोटी भी किस कक्षा में पढ रहा है उस हिसाब से दी जाती है, 9वी कक्षा वाले को एक रोटी, 10वी कक्षा वालें को दो रोटी दी जाती है और 11वी कक्षा वालें को तीन रोटी मिलती है, यंहा रहने वालें बच्चों डर के साए में रहे हैं…

रात में नहीं रहता अधीक्षक चपरासी के भरोसे बच्चे…
धनेगाँव अधीक्षक कभी भी रात्रि में छात्रावास में नही रहता हैं। रात में सिर्फ छात्रावास के भृत्य ही रहते हैं। जबकि नियमानुसार अधीक्षक को छात्रावास में ही रहना चाहिए, यदि अचानक देर रात किसी छात्र का स्वास्थ्य खराब हो जाए, या फिर कोई अन्य अनहोनी हो जाए तो बच्चे किससे अपनी समस्या बताएंगे। जो माता-पिता अपने बच्चों को अपने से दूर छात्रावास में पहुंचाया है, जब उन्हें पता चलेगा कि जिन अधीक्षक के भरोसे उन्होंने अपने बच्चों को छात्रावास में रहने, पढ़ने के लिए भेजा है वे अधीक्षक तो यहां रहते ही नहीं है तो उनके मन में अपने बच्चों के प्रति असुरक्षा की भावना बन सकती है।

इतनी ठंडी में भी बच्चों को ठंडा पानी से नहाना पड़ रहा है,
यंहा रहने वाले बच्चों को इतनी ठंडी में भी बच्चों को ठंडा पानी से नहाना पड़ रहा है इन बच्चों को नहाने के लिए गर्म पानी की कोई सुविधा नहीं है
अब चूंकि यहां अधीक्षक कम ही रहते हैं ऐसे में इन अव्यवस्थाओं को देखने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति ही यहां नहीं रहता।
आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों की दुर्दशा

आदिवासी बाहुल्य छिंदवाड़ा जिले में आदिवासी बच्चों की पढ़ाई की सुविधा के लिए बड़ी संख्या में आदिवासी छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है, जिसके संचालन की जिम्मेदारी आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों को सौंपी गई है लेकिन ये अधिकारी इन छात्रावासों के संचालन में वहां रहने वालों बच्चों की सुविधाओं पर कितना ध्यान देर रहे हैं जिला मुख्यालय से लगे बिछुआ ब्लॉक के इन छात्रावासों की अव्यवस्थाओं को देखकर सहजता से अंदाजा लगाया जा सकता है

