नेतागिरी तो कहीं जुगाड़ से बैठे अतिशेष शिक्षकों….
आदिवासी बालक आश्रम छिंदवाड़ा मुख्यालय में दो अतिशेष शिक्षक…
–जनजातीय कार्य विभाग की गाइड लाइन का नही हो रहा पालन…
ग्रामीण शालाओं से जिला मुख्यालय में हो रही पोस्टिंग….
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ) जिलें के आदिवासी विकासखण्डों के स्कूलों में लगातार रिटायरमेंट से शिक्षकों के पद खाली होते जा रहे हैं तो वहीं बड़ी संख्या में अतिशेष शिक्षक भी जिला मुख्यालय समेत आसपास के स्कूलों में नौकरी कर रहे हैं। ये शिक्षक नेतागिरी के बल या फिर किसी जुगाड़ से जिला मुख्यालय में बैठे हैं। इन पर इस वर्ष 2024-25 की जनजातीय कार्य विभाग की गाइड लाइन का भी इन शिक्षक /शिक्षिकाओं को जिला मुख्यालय से नही हटाया गया है। सूत्रों का कहना है कि यदि गाइड लाइन का ईमानदारी से पालन हो जाए तो ग्रामीण स्तर के अधिकांश स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक मिल जाएंगे।लेकिन
जनजातीय कार्य विभाग में इसका पालन नही हो रहा है इसलिए आज भी ग्रामीण क्षेत्र के अधिकाशं स्कूल आज भी शिक्षक विहीन चल रहे है, या जिलें में अधिकारी और नेतागिरी के बल से शिक्षक जिला मुख्यालय में पदस्थ हो रहे है, आज भी जिला मुख्यालय की कई संस्था में कई अतिशेष शिक्षकों होने की बात सामने आई थी। हर साल 50 से सौ शिक्षक रिटायर हो रहे हैं। हालांकि कुछ फेरबदल हुआ है लेकिन कुछ शिक्षक /शिक्षिकाएं आज भी जिला मुख्यालय की शालाओं में अतिशेष होने के बाद भी नौकरी कर रही,
जनजातीय कार्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार अतिशेष शिक्षकों हटाने के थे आदेश…
जनजातीय कार्य विभाग की गाइड लाइन में अतिशेष शिक्षकों का चिन्हांकन कर उन्हें रिक्त पदों पर भेजना था, जो कुछ हद तक इसमें विभाग ने किया भी लेकिन कुछ नेतागिरी करने वाले शिक्षक /शिक्षिकाएं आज भी जिला मुख्यालय से नहीं हटाये गयें है, जिसमें विभागीय अधिकारी सफल नहीं हो पाएं,
स्कूलों में नहीं मिल पा रहे विषय शिक्षक….
जनजातीय कार्य विभाग में हालत यह है कि जुन्नारदेव, तामिया, हर्रई और बिछुआ विकासखण्ड के स्कूलों के बच्चों को विषय शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। इससे उनका भविष्य दांव पर है। बताते हैं कि यह समस्या केवल छिंदवाड़ा जिले की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की है। सरकार शिक्षकों की भर्ती नहीं कर रही है। इससे रिक्त पदों की पूर्ति नहीं हो पा रही है।

बीइओ ने अतिशेष शिक्षकों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन सफल नहीं हुई…
जनजातीय कार्य विभाग की गाइड लाइन सामने आने के बाद सहायक आयुक्त ने तामिया, जुन्नारदेव, बिछुआ और हर्रई के बीइओ से रिक्त पद और अतिशेष शिक्षकों की जानकारी मांगी है। इसके आधार पर इन अतिशेष शिक्षकों को रिक्त पदों पर समायोजन किया जाना था और कुछ शिक्षकों किया भी गया लेकिन अधिकाश शिक्षकों संबंधित शाला में नहीं गयें और आज भी अधिकाशं शिक्षक ने दुसरे स्कूलों में जॉइनिंग नहीं दिया है.। इनमें कुछ न्यायालयीन स्थगन लेकर आ गए। कुछ ने अभी तक संबंधित स्कूल ही ज्वाइन नहीं किया है।
इससे शिक्षकों की अध्यापन के प्रति घटती रुचि को देखा व समझा जा सकता है।
जिला मुख्यालय के आदिवासी बालक आश्रम शाला में अतिशेष शिक्षक….
जिला मुख्यालय की आदिवासी बालक आश्रम शाला में दो अतिशेष शिक्षक होने के बाद भी बिछुआ के आमझिरी खुर्द से भीम सिंग चौरे माध्यमिक शिक्षक को आदिवासी बालक आश्रम छिंदवाड़ा में पोस्टिंग कर दी गई जबकि यहां पहले से दो अतिशेष शिक्षक चल रहे हैं उसके बाद भी एक शिक्षक की और पोस्टिंग कर दी गई, इस पोस्टिंग ने जनजातीय विभाग को सवालों के घेरे में ला दिया है कि कैसे सहायक आयुक्त ने बीच सत्र में कैसे शिक्षक को अन्य दुसरी शाला स्थानांतरण कर दिए, आखिर ऐसे क्या हुआ शिक्षक को बिछुआ के आमझिरी खुर्द से स्कूल छिंदवाड़ा आश्रम शाला में पोस्टिंग देना पड़ा….?

सहायक आयुक्त के आदेश का अधीक्षक ने नहीं किया पालन…
सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा ने स्थानांतरण आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया था कि स्थानांतरित संस्था में रिक्त पद के आधार पर कार्य ग्रहण कराने की व्यवस्था करे, पद रिक्त न होने पर कार्यालय को सूचित करें लेकिन अधीक्षक आदिवासी बालक आश्रम शाला छिंदवाड़ा ने विभाग से जानकारी नहीं दिया कि इस आश्रम शाला में पहले से ही अतिशेष शिक्षक हैं अधीक्षक ने कहीं ना कहीं विभाग से यह जानकारी छुपी है और दुसरे शिक्षक को 07/08/2025 को शिक्षक की उपस्थिति ले ली