हजारों लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए…
अलीराजपुर (चौथा स्तंभ )अलीराजपुर में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर एक भाव बरेली निकल गई रैली में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक परिधानों में ढोल मांदल की थाप पर नाचते गाते आगे बढे, युवाओं, महिलाओं और बच्चों की उत्साह भागीदारी ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया
रैली शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए निकाली और आदिवासी सांस्कृतिक परंपरा व एकता का संदेश दिया इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि सामाजिक संगठन और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे

आदिवासी समाज के आत्मगौरव, अधिकारों और पंरपराओ को जन जन तक पहुंचाना…
आदिवासी समाज के आत्मगौरव, अधिकारों और परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम हुए..
समाज के लोग शहर के मुख्य मार्ग होते हुए निकलें, उन्होंने परंपरागत वेशभूषा पहनकर लोकनृत्य किया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और झांकियों के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित किया।

वक्ता बोले- आदिवासी युवाओं को अतीत से जुड़ने का संदेश मिला
वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ उत्सव नहीं है। यह एक चेतना है। अपनी पहचान, अधिकार और संस्कृति को जानने और आगे बढ़ाने का अवसर है। इस आयोजन से आदिवासी युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने का संदेश मिला। साथ ही भविष्य के लिए आत्मबल प्राप्त करने का मार्ग भी मिला।
रैली नगर के कई मार्गों से गुजरी। –
रैली नगर के कई मार्गों से गुजरी।
आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा
रैली के बाद जागरूकता आमसभा का आयोजन हुआ। इसमें आदिवासी समाज के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा प्रतिनिधि और क्षेत्रीय नेतृत्व शामिल हुए।
सभा में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा हुई। जल, जंगल, जमीन पर हक और सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के विषयों पर भी बात हुई। संस्कृति और परंपरा के संरक्षण पर भी विचार-विमर्श किया गया।
रैली में शामिल लोग तलवार और ध्वज थामे नजर आए। –
रैली में शामिल लोग तलवार और ध्वज थामे नजर आए। जिलें के कई गांवों से लोग रैली में शामिल हुए
रैली में शामिल लोगों ने हाथों में आदिवासी महापुरुषों के चित्र, तिरंगा, धर्मध्वजा और आदिवासी संस्कृति के शस्त्र लिए थे। वे डीजे की धुन पर नाचते रहे।

कई लोग आदिवासी पारंपरिक पोशाक पहने हुए थे। रैली का अनेक स्थानों पर विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।