नाबालिग अनुसूचित जाति की छात्रा को आरोपी के परिवार को सौंपने के बाद फिर से दुष्कर्म, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल..?

Chautha Sthambh

न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर और एसपी को सौंपा गया ज्ञापन
पन्ना( चौथा- स्तंभ) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में अपहरण और दुष्कर्म की शिकार एक अनुसूचित जाति की नाबालिग छात्रा को वन स्टॉप सेंटर और बाल कल्याण समिति द्वारा आरोपी के परिजनों को सौंप दिए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इतना ही नहीं, आरोपी द्वारा छात्रा के साथ दोबारा दुष्कर्म किए जाने की घटना ने जिले भर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।

स्कूल से आते समय छात्र हुई थी लापता..?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 जनवरी 2025 को छात्रा स्कूल से घर लौटते समय लापता हो गई थी, जिसकी गुमशुदगी रिपोर्ट परिजनों द्वारा थाना सिमरिया में दर्ज कराई गई थी। करीब एक माह बाद, 17 फरवरी 2025 को पुलिस द्वारा छात्रा को हरियाणा के गुरुग्राम से बरामद किया गया। आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। लेकिन पीड़िता ने पुलिस द्वारा डराने-धमकाने के चलते मेडिकल जांच से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसे वन स्टॉप सेंटर भेजा गया।

वन स्टॉप सेंटर एंव बाल कल्याण समिति द्वारा छात्रा को आरोपी के परिजन के हवाले….

विवाद तब गहरा गया जब परिजनों को पता चला कि वन स्टॉप सेंटर एवं बाल कल्याण समिति द्वारा छात्रा को आरोपी के परिजनों के हवाले कर दिया गया है। परिजनों द्वारा इस संबंध में 21 अप्रैल 2025 को कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को आवेदन सौंपा गया, लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।

अनुसूचित जाति से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर एंव एसपी को सौपा ज्ञापन….

अब, पीड़िता ने छतरपुर जिले में फिर से आरोपी द्वारा दुष्कर्म किए जाने की शिकायत दर्ज कराई है। इस गंभीर प्रकरण को लेकर अनुसूचित जाति से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एडवोकेट संजय अहिरवार, भूपत अहिरवार, अशोक अहिरवार के नेतृत्व में कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपते हुए न्यायिक जांच तथा सभी दोषियों — जिनमें बाल कल्याण समिति और वन स्टॉप सेंटर के अधिकारी भी शामिल हैं —

सख्त कार्रवाई की मांग की है…

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा बाल संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 16, 19 एवं 21 का घोर उल्लंघन किया गया है, जो न केवल गैरकानूनी है, बल्कि न्यायहित में भी क्षमा योग्य नहीं। इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले सभी संबंधितों को पद से हटाकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

संजय अहिरवार एडवोकेट (समाजसेवी)

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