भ्रष्टाचार की बन रही छात्रावास इमारत क्या बना पाएगा, आदिवासी बच्चों का भविष्य….

Chautha Sthambh

धटिया सामग्री का इस्तेमाल कर किया जा रहा छात्रावास भवन का निर्माण, अधिकारी बेखबर…?


छिंदवाड़ा (चौथा- स्तंभ) जिलें के आदिवासी ब्लॉक तामिया मुख्यालय में बन रहे आदिवासी समाज के बच्चों के लिए छात्रावास भवन निर्माण कार्य में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है यहां पर आदिवासी उत्कृष्ट छात्रावास भवन में लगने वाली सामग्री बहुत ही घटिया किस्म की है और जिससे रहकर छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ पूरी तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है जिसकी लागत करोडों रुपए है निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार खुलकर सामने आया है जिसमें देखा गया भवन निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली रेत भी मिट्टी वाली है जिससे आने आने वाले समय में छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चों के लिए घातक सिद्ध हो सकती है,

सूत्रो की जानकारी के अनुसार छात्रावास में घटिया किस्म को सामग्री इस्तेमाल होने से छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है सारा काम छिंदवाड़ा के एक ठेकेदार को दिया गया है जो इंजीनियर से साठगांठ कर मोटी रकम बचाने की जुगत में है कमीशन के चक्कर में इंजीनिगर भी इसमें पूरा सहयोग कर रहे हैं यदि इसी तरह छात्रावास भवन का निर्माण कार्य जारी रहा तो छात्रावास भवन की उम्र ज्यादा दिन नहीं रहेगी और कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है छात्रावास भवन के लिए खोदी गई भीम भी ज्यादा गहरी नही है टेड़ी-मेढ़ी है जिसे देखने से ही पता चलता है कि किस तरह भवन का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

छात्रावास भवन निर्माण में भ्रष्टाचार…

छिंदवाड़ा जिले के तामिया मुख्यालय में आदिवासी छात्रों के लिए बनने वाला छात्रावास भवन में जहां आदिवासी बच्चों के भविष्य को गढ़ाने का कार्य किया जाएगा इस छात्रावास भवन से बच्चे अपना भविष्य तराशकर देश का भविष्य बनने का कार्य करेंगे परंतु जब नींव कमजोर हो तो इमारत बुलंद नहीं हो सकती और वह टिकाऊ भी नहीं होती प्रारंभिक स्तर पर ही उक्त भवन के निर्माण का कार्य भ्रष्टाचार के मसले से लिप्त है पूरी तरह गुणवत्ता विहीन है ऐसी स्थिति क्या इस आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के भविष्य को उज्जवल सपने देखने का अवसर मिल पाएगा यह तो आने वाला वळ ही बताएगा। जो में

जनजातीय विभाग के इंजीनियर एंव पीआईयू के अधिकारी बेखबर

अधिकारियों ने कमीशन की लालव में आंख मूंदली है कि उन्हें छाटेढ़ी-मेढ़ी छात्रावास भवन में उपयोग होने वाली धटिया सामग्री भी नही देख रही है इससे साफ पता चलता है कि किस तरह इंजीनियर और कॉन्टैक्टर की मिली भगत से घटिया निर्माण कार्य हो रहा है बिना सूचना बोर्ड के प्रारंभ कर दिया निर्माण कार्य शासन के निर्देशानुसार किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में कार्य प्रारंभ करने से पहले एजेंसी का नाम लागत संबंधित इंजीनियर का नाम अधिकारी का नाम व मोबाइल नंबर लगाना होता है। पर यहां तो बिना सूचना बोर्ड के ही कार्य प्रारंभ कर दिया गया।

आदिवासी समाज ने लोगों ने की जांच की मांग…
तामिया मुख्यालय में बन रहे आदिवासी उत्कृष्ट छात्रावास भवन के निर्माण में गुणवत्ता विहीन सामग्री का उपयोग किए जाने एवं मनमानी तरीके से भवन का निर्माण किए जाने को लेकर आदिवासी समाज के लोगों में आक्रोश है उनका कहना है कि हमारे बच्चे इस छात्रावास में रहकर शिक्षा ग्रहण करेंगे लेकिन भवन की स्थिति जब अच्छी नहीं होगी तो ऐसे में बच्चों का जीवन संकट में रहेगा आदिवासी समाज के लोगों ने पीआईयू एवं जनजाति विभाग के अधिकारी से उक्त भवन के निर्माण की जांच कर निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने की मांग की है..

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