मध्यप्रदेश में राजस्व विभाग में उठी बगावत की आंधी!
सिवनी/शासन के विवादित फैसले से नाराज़ राजस्व अधिकारियों ने प्रदेशभर में मोर्चा खोल दिया है। न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के जबरन विभाजन के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान हो चुका है। 6 अगस्त से प्रदेश के 45 जिलों में राजस्व अधिकारी सभी शासकीय कार्यों से विरत रहेंगे, सिर्फ आपदा प्रबंधन को छोड़कर। अफसर मुख्यालयों में मौजूद रहेंगे, लेकिन फाइलें नहीं चलेंगी, काम नहीं होगा —

विरोध अब सड़कों से दफ्तरों तक पहुंच चुका है…
हालांकि सभी अधिकारी जिला मुख्यालयों पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन न कोई काम करेंगे, न दस्तखत — डिजिटल सिग्नेचर सीलबंद कर दिए जाएंगे और व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने का फैसला भी हो चुका है।

राजस्व अधिकारी संघ का आरोप है कि शासन ने पहले दिए गए मौखिक आश्वासनों को तोड़ा, और बिना संसाधन दिए जबरन विवादित योजना लागू कर दी। इससे राजस्व न्यायालयों का मर्ज होना, और कार्यपालक मजिस्ट्रेट्स पर अतिरिक्त दबाव जैसी गंभीर व्यवस्थागत गड़बड़ियां पैदा हो गई हैं।

अधिकारियों की मांग है — यह विभाजन योजना तत्काल रद्द की जाए, अन्यथा आंदोलन और तेज किया जाएगा।
संघ ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से त्वरित हस्तक्षेप की अपील की है।
फिलहाल प्रदेश का राजस्व अमला आंदोलन की राह पर है — प्रशासन की चुनौती बड़ी हो चुकी है।

सतीश चौधरी – तहसीलदार