छात्रावास के बच्चों से अधीक्षक करवा रहा था खेत का काम…
छात्रावास में निवासरत छात्रों को अधीक्षक द्वारा भुट्टे तोडने का कार्य करता था छात्रों से…
आखिर कहाक्षहै जिम्मेदार अधिकारी, विभाग के अधिकारी को क्यों नहीं दिखती कमियां..?
रिपोर्ट -ठा. रामकुमार राजपूत
मोबाइल -8989115284
चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा) मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जनजाति कार्यविभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में इन दोनों अधीक्षक अपने निजी काम छात्रों से करते नजर आ रहे हैं ऐसा ही मामला हर्रई विकासखंड के बटकाखापा आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास में देखने को मिला था, जिसकी शिकायत बच्चों के द्वारा कलेक्टर से की गई थी, इसके बाद आज सहायक आयुक्त ने जांच उपरांत देवेश साहू को छात्रावास अधीक्षक पद से हटाते हुए उन्हें हर्रई विकासखंड कार्यालय में कार्य मुक्त कर दिया है…
छात्रावास में निवासरत बच्चे से अधीक्षक करता था मजदूरी ..?
जिलें के जनजाति कार्य विभाग के द्वारा संचालित छात्रावासों में इन दिनों अधीक्षक बेलगाम हो चुके हैं और इनका नियंत्रण जिलें में पदस्थ सहायक आयुक्त का इन अधीक्षक पर नही है, जिसके कारण अधीक्षक इतने लापरवाही हो गयें है कि गरीब आदिवासी बच्चे जिनके माता-पिता ने उन्हें अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए इन छात्रावास में रखा है लेकिन यंहा पदस्थ अधीक्षक उनसे मजदूरी का काम करा रहे है और जिलें में बैठे सहायक आयुक्त अधीक्षक पर कोई कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं शिकायत के बाद भी सहायक आयुक्त ने देवेश साहू अधीक्षक को सिर्फ छात्रावास से कार्य मुक्त किया है इन पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई, जबकि ऐसे अधीक्षक पर कठोर से कठोर कार्रवाई होना चाहिए था

सरकार की योजना में पानी फेर रहे अधीक्षक एवं जिले में बैठे अधिकारी…?
जी हाँ ये बात सही है कि जंहा सरकार आदिवासी समाज के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके इसलिए बच्चों की शिक्षा के लिये सरकार तमाम सुविधा दे रही है वहीं अभिभावक भी अपने बच्चों को पढ़ने होस्टलों में भेज रहे जिससे आदिवासी समाज के बच्चा पढ़ाई करके आगे कुछ कर सके लेकिन बच्चों के अभिभवको को क्या पता की जिन बच्चों को पढ़ाई के लिये भेजा गया है उन्ही बच्चों से अधीक्षक मजदूरी के काम छोटे छोटे बच्चों से करा रहा है।
पूरा मामला आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास बाटकाखापा का है जंहा अधीक्षक देवेश साहू के द्वारा बच्चों से भुट्टे तोडने के लिए बच्चों को खेत में काम करता था ये पूरा मामला बटकाखापा छात्रावास का है
आखिर निगरानी करने वाले मंडल संयोजक, क्षेत्र संयोजक कहा थे…
जनजाति कार्य विभाग के द्वारा इन छात्रावास एवं आश्रम शालाओं की निगरानी के लिए जिले में मंडल संयोजक क्षेत्र संयोजक की नियुक्ति की गई है जो हर छात्रावास की निगरानी एवं देखरेख करते हैं आखिर उन्हें यह क्यों नहीं देखा कि अधीक्षक के द्वारा इन बच्चों के द्वारा मजदूरी कराई जा रही थी और इसकी शिकायत उन तक क्यों नहीं पहुंची,आखिर जनजातीय विभाग के सहायक आयुक्त और दुसरे अधिकारी इन आदिवासी बच्चों की उपेक्षा क्यों करते नजर आ रहे हैं..

कलेक्टर से शिकायत के बाद बटकाखापा अधीक्षक को हटाया गया…
जिले के जनजाति कर विभाग में यह बड़ी विडंबना है कि बच्चे बार-बार शिकायत करते हैं उसके बाद भी विभाग के अधिकारी इन अधीक्षक पर कोई कार्यवाही नहीं करते जब तक उच्च अधिकारी तक कोई शिकायत नही करता तब तक छात्रावास अधीक्षक पर कार्रवाई नहीं होती ऐसा ही मामला बाटकाखापा सीनियर छात्रावास में देखने को मिला जब कलेक्टर महोदय के द्वारा चिलक में चौपाल लगाई गई थी तब बच्चों ने वहां शिकायत की तब जाकर आज अधीक्षक को हटाया गया. जबकि ऐसे अधीक्षक पर कठोर से कठोर कार्रवाई होना चाहिए था…

