उड़ान फाउंडेशन हायर सेकेंडरी स्कूल कुंडा में बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे! नियमों को ताक पर रखकर चल रहा स्कूल
दो मंजिला स्कूल में फायर सेफ्टी नदारद, बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चे… हादसे के बाद भी प्रशासन मौन
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ )जिलें के चौरई क्षेत्र में संचालित उड़ान फाउंडेशन हायर सेकेंडरी स्कुल कुंडा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा से खुला खिलवाड़ कर रहा है और जिम्मेदार विभाग सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्कूल दो मंजिला इमारत में फायर सेफ्टी के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं..?
सूत्रों की जानकारी के अनुसार स्कूल की दो मंजिला इमारत में फायर सेफ्टी के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो पर्याप्त अग्निशमन यंत्र हैं और न ही सुरक्षा के अन्य मानक पूरे किए गए हैं। इसके बावजूद यहां सैकड़ों बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जो किसी बड़े खतरे को न्योता देने जैसा है।जबकि स्कूल के पास विद्युत विभाग का शब्द स्टेशन भी बना हुआ है जहां पर हर समय बिजली का काम होता है स्कूल इतने पास है कि यहां कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है लेकिन फिर भी यहां पर फायर सेफ्टी के सुरक्षित कोई इंतजाम नहीं है

बसों में ठूंस-ठूंसकर भरे जाते हैं बच्चे
स्कूल की बसों में भी सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरोप है कि बसों में क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को भरकर लाया-ले जाया जाता है, जिससे बच्चों की जान हर दिन जोखिम में रहती है। कुछ दिन पहले ही उड़ान फाउंडेशन कुंडा की एक बस पलट गई थी, जिसमें कई बच्चे घायल हो गए थे। इस हादसे ने स्कूल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी न स्कूल शिक्षा विभाग ने कोई सख्त कदम उठाया और न ही जिला प्रशासन ने कार्रवाई की।

शिक्षा विभाग के डीपीसी एंव बीआरसी की मिलीभगत के आरोप…
सूत्रों का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर स्कूल को परमिशन देने में जिला शिक्षा केंद्र एंव जनपद शिक्षा केंद्र के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। वहीं परिवहन विभाग भी ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूल बसों की नियमित जांच नहीं करता, जिससे ऐसे स्कूल संचालकों की मनमानी बढ़ती जा रही है।
अभिभावकों में नाराजगी
घटना के बाद से अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते सख्ती करता तो बच्चों की जान जोखिम में नहीं पड़ती।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर उड़ान फाउंडेशन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी?

