सांदीपनि विद्यालय हर्रई में शिक्षकों से बिस्तर किराया वसूली” संबंधी खबर भ्रामक, संस्था ने किया सख्त खंडन

Chautha Sthambh

सांदीपनि विद्यालय हर्रई में शिक्षकों से बिस्तर किराया वसूली” संबंधी खबर भ्रामक, संस्था ने किया सख्त खंडन
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ )हर्रई के संदीपनी विद्यालय के बिषय में समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर “सांदीपनि विद्यालय हर्रई में परीक्षा के दौरान रूके शिक्षकों से बिस्तर का किराया वसूला गया” को लेकर संस्था की ओर से सख्त आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे पूरी तरह भ्रामक, तथ्यों से परे और बेबुनियाद बताया गया है।
संस्था प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान बाहर से आए महिला एवं पुरुष केन्द्राध्यक्षों की रुकने की व्यवस्था शासकीय सांदीपनि विद्यालय हर्रई में की गई थी। विद्यालय द्वारा संबंधित शिक्षकों को साफ-सुथरे कक्ष, पेयजल, गरम पानी सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं।
विद्यालय में कंबल, गद्दे एवं तकिए की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण टेंट हाउस से अस्थायी रूप से बिस्तर मंगवाए गए थे, जिसके किराए के संबंध में संबंधित केन्द्राध्यक्षों को पहले ही अवगत करा दिया गया था। परीक्षा समाप्ति के बाद कुछ केन्द्राध्यक्षों द्वारा टेंट हाउस के बिस्तर का किराया स्वयं भुगतान किया गया, जिसकी पावती भी उपलब्ध है।


वहीं शासकीय कन्या उ.मा.वि. हर्रई के पुरुष केन्द्राध्यक्ष एवं सहायक केन्द्राध्यक्ष के लिए प्रारंभ में शासकीय मॉडल स्कूल में रुकने की व्यवस्था की गई थी, जहां सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध थीं। किन्तु उनके द्वारा वहां रुकने से मना करने के बाद उन्हें भी सांदीपनि विद्यालय हर्रई में ठहराया गया। इस दौरान जब बिस्तर किराए की बात सामने आई तो जिला शिक्षा अधिकारी से चर्चा के बाद उनसे किसी भी प्रकार का किराया नहीं लिया गया और उनका भुगतान स्वयं विद्यालय द्वारा किया गया, जिसकी पावती भी उपलब्ध है।


संस्था प्रबंधन का कहना है कि कुछ लोगों द्वारा बिना तथ्यों की पुष्टि किए प्रकाशित की गई खबर से संस्था की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है, जो पूरी तरह अनुचित है।

समाचार में छपी खबर जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी की गई थी

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  • वही समाचार में प्रकाशित खबर जनसंपर्क छिंदवाड़ा से प्रकाशन हेतु समाचार पत्र को दी गई थी इसलिए खबर प्रकाशित हुई है इसमें समाचार पत्रों की कोई गलती नहीं है यह खबर जनसंपर्क को सहायक आयुक्त जनजाति कार्यविभाग द्वारा प्रेषित की गई थी…

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