कलेक्टर की पहल पर ‘ग्रीन होली’ का संदेश: होलिका दहन में गोबर की लकड़ी के उपयोग का आह्वान

Chautha Sthambh

कलेक्टर की पहल पर ‘ग्रीन होली’ का संदेश: होलिका दहन में गोबर की लकड़ी के उपयोग का आह्वान

पांढुर्णा (चौथा स्तंभ ) इस वर्ष होली के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक पहल करते हुए कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ ने नागरिकों से अपील की है कि होलिका दहन के लिए पेड़ों की लकड़ियां काटने के बजाय ‘गोबर की लकड़ी’ (गुलारी/कंडे) का उपयोग करें। यह पहल सौसर से प्रारंभ की गई है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना है।

कलेक्टर श्री वशिष्ठ ने संदेश में कहा कि इस बार की होली में हम एक छोटा सा लेकिन बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। एक होलिका दहन में कई पेड़ कट जाते हैं, जबकि गोबर की लकड़ी के उपयोग से जंगलों को बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक रूप से गोबर के जलने से निकलने वाला धुआं हवा के हानिकारक बैक्टीरिया को समाप्त करने में सहायक होता है और वातावरण को शुद्ध करता है। साथ ही इसकी राख एक बेहतरीन प्राकृतिक खाद के रूप में उपयोगी है, जो मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाती है।

कलेक्टर श्री वशिष्ठ ने यह भी कहा कि जब नागरिक गोबर की लकड़ी खरीदते हैं तो वे सीधे तौर पर गौशालाओं के स्वावलंबन में सहयोग करते हैं। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि हमारी संस्कृति और गौ-माता के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि जिन पेड़ों की छांव में हम बड़े हुए, क्या उन्हीं को काटकर त्योहार मनाना उचित नहीं है, होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, इसलिए प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली प्रवृत्ति को त्यागकर ‘ग्रीन होली’ मनाना समय की मांग है।

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  • गोबर की लकड़ी कहाँ से प्राप्त करें?

    नागरिक अपनी नजदीकी नगर पालिका से संपर्क कर “गोबर की लकड़ी/कंडे” प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन द्वारा इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।कलेक्टर श्री वशिष्ठ ने समस्त नागरिकों से अपील की है कि इस बार ‘ग्रीन होली’ मनाएं— एक कदम प्रकृति की ओर, एक कदम शुद्धता की ओर।

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